फोटो संख्या : 3थाना से कोर्ट तक चल रहा है विवादित जमीन का मामलापरिजनों का रो-रो कर बुरा हुआ हाल पूसा. जमीन भले एक कट्ठा तीन धूर है लेकिन इसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है. इसको लेकर रामचंद्र पोद्दार का गांव के ही कुछ लोगों के साथ करीब तीन वर्षों से विवाद चल रहा है. इस क्रम में कई बार विवाद गहराया तो मामला थाने पहुंचा. बात यहीं थम जाती तो ठीक था लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सूत्रों की मानें तो तत्कालीन सीओ प्रभात कुमार दत्त ने इस विवाद को अपने स्तर से सुलझाने का हर संभव प्रयास किया लेकिन दोनों में से कोई भी पक्ष उनकी सुनने के लिए राजी नहीं हुआ. तब तक मामला कोर्ट पहुंच चुका था. इसके फैसले अभी आने बाकी हैं. कहा जा रहा है कि इसी बीच इसी भूमि को लेकर विवाद इस कदर गहराया गया कि रामचंद्र की जान चली गयी. बहरहाल इस मामले में कौन कौन आरोपित हुए पुलिस इसका तो फिलवक्त खुलासा नहीं कर रही है लेकिन मृतक के परिजन पांच लोगों को आरोपित कर रहे हैं. उधर, रामचंद्र की मौत की सूचना जैसे ही उसके घर पहुंची कोहराम मच गया. पत्नी उर्मिला देवी अपनी सिंदूर के धुल जाने के गम में बेसुध थी तो छोटे पुत्र शंकर पोद्दार व उसकी पत्नी का हाल भी बुरा था. इन्हें घर के बुजुर्ग का साया उठने की टीस अंदर तक सता रही थी. पेशे से दुकान चलाने वाले इस पुत्र के काम काज में रामचंद्र यदा कदा हाथ बंटा दिया करता था जिससे उसे सहूलियत मिल जाती थी जो अब छिन गया है. गांव के लोगों में चर्चा थी कि जिस भूखंड को लेकर विवाद था वह पड़ा रह गया और खुद चल बसे. इसलिए विवाद किसी समस्या का निदान नहीं होता. समस्या सूझबूझ और बातचीत से ही हल होती है जिसका ख्याल रखना चाहिए.
एक कट्ठा तीन धूर जमीन के लिए गयी रामचंद्र की जान
फोटो संख्या : 3थाना से कोर्ट तक चल रहा है विवादित जमीन का मामलापरिजनों का रो-रो कर बुरा हुआ हाल पूसा. जमीन भले एक कट्ठा तीन धूर है लेकिन इसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है. इसको लेकर रामचंद्र पोद्दार का गांव के ही कुछ लोगों के साथ करीब तीन वर्षों से विवाद चल […]
