हादसा रोकने की दिशा में प्रशासन शिथिल
दलसिंहसराय : सतर्कता की कमी से बड़े बड़े सड़क हादसों को अंजाम दे रही है. लेकिन इससे भी दुखद पहलू यह है कि सड़क हादसा रोकने की दिशा में क्या परिवहन विभाग या प्रशासन की कोई भूमिका नहीं. क्या वाहन संचालकों या चालकों के लिए कोई मापदंड नहीं. ट्रैफिक नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराने में संबंधित विभाग सक्षम नहीं रहा.
आज इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि लोगों के जिंदगी की कीमत ही सिर्फ बीस हजार रुपये मात्र है जिसके चलते अक्सर सड़क हादसों के बाद लोगों में सिर्फ पारिवारिक लाभ योजना के तहत मिलने वाले बीस हजार रुपये की राशि प्राप्त करने के लिए घंटों सड़क जाम की प्रवृत्ति बढ़ गयी है.
ऐसे में जाम में फंसे मरीजों या यात्रियों का क्या दोष, जो उन्हें जाम में फंसकर घंटों फजीहत झेलनी पड़ती है. एक्सीडेंटल जोन में विभागीय सतर्कता के उपाय, ट्रैफिक नियमों का अ नुपालन, गति सीमा, लोगों में सतर्कता व जागरूकता, ट्रैफिक पुलिस की अनिवार्यता समेत कई ऐसे अनसुलझे प्रश्न है जो लोगों की जेहन में कौंध रहे हैं.
आखिर क्यों बढ़ गयी है सड़क हादसे. सुरक्षा उपायों के प्रति परिवहन विभाग व स्थानीय प्रशासनिक शिथिलता से इनकार नहीं किया जा सकता. क्षेत्र के चिह्न्ति एक्सीडेंटल जोन में तो खासकर ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था व ट्रैफिक नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराना तो आवश्यक है. मगर ऐसा देखा जा रहा है कि एक्सीडेंटल जोन की कौन कहें, कहीं भी न तो ट्रैफिक पुलिस ही है और न ही इस दिशा में प्रशासनिक या पुलिस स्तर पर कोई व्यवस्था की जा रही है.
परिणाम यह है कि हर वाहन चालकों ने तो जैसे परिवहन अधिनियमों का अनुपालन न करने की दिशा में मानो कसम ही खा ली है. तेज रफ्तार वाहनों का परिचालन येनकेन प्रकारेण वाहनों का साइड लेने समेत अन्य कारणों से अक्सर हादसे होते हैं. लेकिन संबंधित प्रशासन रोकने में अब तक विफल रहा है.
