फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम : लक्ष्य से कोसों दूर खानपुर पीएचसी
खानपुर : छोटा परिवार सुखी परिवार के तहत स्वास्थ्य विभाग महिलाओं का बंध्याकरण कराने के लिए विशेष अभियान चला रखी है. विभाग द्वारा परिवार नियोजन पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है लेकिन जनसंख्या वृद्धि में कमी लाने की यह योजना आज भी धरातल पर शत प्रतिशत नहीं उतर पाया है. इसका ताजा उदाहरण है वर्ष 2014-15 में हुए बंध्याकरण का परिणाम.
जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लक्ष्य भी निर्धारित किये गये हैं. जिस टार्गेट में चिकित्सक से लेकर आशा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गयी है. जहां चिकित्सकों को बंध्याकरण करना है एवं आशा कार्यकर्ताओं को जागरूक कर महिलाओं को अस्पताल तक लाना है.
इसके एवज में बंध्याकरण कराने वाली महिलाओं केा 14 सौ रुपये व उन्हें इसके लिए प्रेरित करने वाली आशा को 2 सौ रुपये देने का प्रावधान है. जबकि पुरुष नसबंदी कराने पर लाभुकों को 2 हजार रुपये व उन्हें प्रेरित करने वाले को 3 सौ रुपये प्रोत्साहन के रूप में देने का नियम है. जानकारी के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में बंध्याकरण का टार्गेट सुनकर ही सभी कराह रहे हैं.
जहां चिकित्सक लक्ष्य पूरा करने के लिए चिंतित हैं. वहीं आशा इस बात को लेकर परेशान कि आखिर इतनी महिलाएं बंध्याकरण के लिए आयेगी कहां से. ध्यान दें तो एक तरफ जहां परिवार नियोजन को सफल बनाने के लिए विभाग द्वारा कई सुविधाएं मुहैया करायी जाती है वहीं लोगों में जागरूकता के लिए आशा को समय समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है.
जबकि प्रत्येक सप्ताह पीएचसी पर कैंप लगा कर बंध्याकरण भी किया जाता है. बावजूद इसके कार्यक्रम लक्ष्य से दूर है. बताया गया है कि वर्ष 2014-15 में 21 सौ महिलाओं के बंध्याकरण का लक्ष्य था जिसमें से महज 779 महिलाओं का ही बंध्याकरण हो सका. जबकि पुरुष नसबंदी का परिणाम शून्य है. इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं अभियान में कमी है जिसे दूर करने की जरूरत है.
