फोटो ::::::::::::10समस्तीपुर. मानव को ईश्वर बोध की नितांत आवश्यकता है. इसके उपरांत ही मानव को रचनाकार जिसे हम कई नामों से पुकारतें है. इसका बोध होता है. सभी धमोंर् में अनेक नामों के बाद भी एक परम अस्तित्व का जाननें का संदंश दिया है .उक्त बातें केंद्रीय प्रचारक प्रकाश जोशी ने संत निरंकारी मंडल के सत्संग कार्यक्रम के प्रवचन में कही. स्थानीय जुट मिल प्रांगण मेंे विशाल सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. श्री जोशी ने कहा की मानवता को विश्वबंधुत्व, सद्भाव्, शांति, व सह अस्तित्व को एक सुत्र में पिरोने का काम ईर्श्वर बोध से ही हो सकती है.मानव सही अथोंर् में मानव तभी कहलायेगा. जब वह मानवीय मूल्यों पर आधारित मानवता का धर्म अपनायेगा. इससे मानव अशांत दशा से शांत दशा की ओर अग्रसर होता है. इस अवसर पर बिहार के जोनल इंचार्ज एस पी सिंह, दलसिंहसराय के बृजु सिंह, हृदयनारायण जी, मनोज तनेजा, राम प्रकाश जी, तारणी प्रसाद, एम के कर्ण, अशोक पासवान, रामविलास चौधरी, सोनी बहन, गंगा बहन सहित सैकड़ों श्रद्धालु शामिल थे.
ईश्वर बोध के बाद होता है रचनाकार का साक्षात्कार
फोटो ::::::::::::10समस्तीपुर. मानव को ईश्वर बोध की नितांत आवश्यकता है. इसके उपरांत ही मानव को रचनाकार जिसे हम कई नामों से पुकारतें है. इसका बोध होता है. सभी धमोंर् में अनेक नामों के बाद भी एक परम अस्तित्व का जाननें का संदंश दिया है .उक्त बातें केंद्रीय प्रचारक प्रकाश जोशी ने संत निरंकारी मंडल के […]
