मोहनपुर : व्यवस्था के विरुद्ध निरंतर लड़ने और हार जाने से वह कुंठित भी नहीं है, न ही विचलित. प्रखंड के रसलपुर गांव के जुझारू व्यक्तित्व हेमनारायण सिंह के पुत्र हरिनाथ सिंह की पत्नी है नीलम सिन्हा. उसने स्थानीय जीएमआरडी कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी.
उन दिनों संचालन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय करता था. नीलम को इंटर में तीसरी श्रेणी से सफलता मिली. जीएमआरडी कॉलेज मोहनपुर के अर्थशास्त्र बीए में नामांकन कराते हुए इंटर परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा को लिखा. आश्चर्य की बात कि विश्वविद्यालय ने नीलम के तीसरी श्रेणी वाले परीक्षा परिणाम को भी कदाचार में संलिप्त होकर परीक्षा देने के आरोप में रद्द कर दिया कॉलेज ने नामांकन. यहीं से नीलम की लड़ाई आरंभ हुई. जिस परीक्षा केंद्र से उसने परीक्षा दी थी, उसके केंद्राधीक्षक ने नीलम को लिखित क्लिनचिट दिया कि नीलम के विरुद्ध परीक्षा में कदाचार करने का कोई सबूत नहीं. इस बीच विश्वविद्यालय ने उसके 1986 तक परीक्षा में बैठने पर रोक लगा दी. तब वह हाई कोर्ट कर शरण ली.
कोर्ट ने उसके पक्ष में निर्णय देते हुए विश्वविद्यालय को परीक्षा परिणाम प्रकाशित करने का निर्देश दिया. 1984-86 में उसकी विशेष रूप से ली गयी स्नातक परीक्षा ने उसे सफल घोषित किया, तब तक उसकी नौकरी की उम्र जाती रही. आइएएस अधिकारी बनने का उसका सपना मटियामेट हो गया. 1991 में उसे जीएमआरडी कॉलेज मोहनपुर में स्थायी नौकरी दी जायेगी. स्नातक की परीक्षा अच्छे अंकों से पास करने के अतिरिक्त उसने टंकण एवं आषुलिपि-लेखन भी सीखा. परंतु उसे कहीं नौकरी नहीं दी गयी. आर्थिक विसंगतियों से जूझती हुई एक कुलीन महिला के हक की लड़ाई उसकी निजी लड़ाई अवश्य है, पर व्यवस्था की पोल यहीं से खुलती है.
