नहीं सुलझी हत्या की गुत्थी

मोरवा : एक जनवरी को वह काली रात. दिल में अपनों से मिलने की खुशी और घर से निकलने की तैयारी. इन्ही सब उहापोह में जगदीशपुर निवासी आनंद महतो का बड़ा पुत्र देवेंद्र उर्फ देवारु रातभर सो न सका. 2 जुलाई की अहले सुबह वह अपनी बहन से मिलने घर से निकला. वह विकलांग युवक […]

मोरवा : एक जनवरी को वह काली रात. दिल में अपनों से मिलने की खुशी और घर से निकलने की तैयारी. इन्ही सब उहापोह में जगदीशपुर निवासी आनंद महतो का बड़ा पुत्र देवेंद्र उर्फ देवारु रातभर सो न सका. 2 जुलाई की अहले सुबह वह अपनी बहन से मिलने घर से निकला.
वह विकलांग युवक हाथ में लाठी और साइकिल लिये बांदे उसराहा गांव के लिए निकला तो जरूर लेकिन बहन से मिलने की तमन्न उसका पूरा न सका और दरबा गांव के पास उसकी हत्या कर दी गयी. हत्या का दृश्य ऐसा कि देखने वालों का रूह कांप जाये. अपराधियों ने पहले उसका गला रेता. उससे भी जब मन नहीं भरा तो पेट में धारदार हथियार घुसा उसकी आंत निकाल दिया. हाथ पर लिखे गोदना से उसकी पहचान हो सकी. पुलिस शव को पोस्टमार्टम कर अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया.
तत्कालीन ओपी अध्यक्ष अभिषेक अंजन ने मामले का उद्भेदन करते हुए अपराधियों की शिनाख्त कर लेने का दावा किया. पुलिस उसके पीछे लगी रही और हत्या का ठिकाना बदलता रहा. एक दिन सूचना पर उसे पकड़े पुलिस निकली. लेकिन आला अधिकारियों ने उसे वापस लौटने का निर्देश दिया. वजह बताया गया कि निकसपुर कॉलेज प्रकारण. जिला की सभी पुलिस बलों को शांति व्यवस्था के लिए निकसपुर बुला लिया गया और अपराधी एक बार फिर पुलिस गिरफत से बच गया. तब से अबतक छह माह बीत चुके हैं.
लेकिन पुलिस अब तक सक्रिय नहीं हो सकी है. अब तो देवारु के पिता की आग भी ठंडी पड़ गयी है और पुलिसिया अनुसंधान भी ठंडे बस्ते में रख दिया गया. इधर मृतक देवारु की विधवा और बच्चे न्याय की आस भी छोड़ चुके हैं. छोटो बेटा बबलू पिता की याद ताजा करने की कोशिश तो जरुर करता है लेकिन, बीतते समय के साथ उसकी याद धुंधली होती चली गयी. पुलिस को भी मलाल है कि लाख प्रयास के बावजूद अपराधी उसकी आंखों में धूल झोंकता रहा.

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