विद्यापतिनगर. दलित छात्रों के कल्याण के लिये वषार्ें पूर्व बना छात्रावास उद्देश्य से भटक कर जर्जरता का शिकार हुआ है़ भवन सहित लाखों के उपस्कर कालकवलित हो गये़ इसे लेकर मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1980 में ग्यारह लाख की लागत से दलित छात्रावास का निर्माण कराया गया था़ इसके अलावे लगभग पांच लाख रुपये के उपस्कर से इसे सजाया गया़ छात्रावास में एक सौ मेधावी दलित वैसे छात्र के रह कर पढ़ने की व्यवस्था की गयी जो दूर दराज से यहां शिक्षा प्राप्त करने आया जाया करते थे़ साथ उन्हें भी शामिल किये जाने की बात थी जो आर्थिक रूप से गरीब थे़ इन मंशा पर तब पानी फिर गया़ जब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद दलित छात्रावास को हैंडओवर किये जाने की बात आयी़ समय बीतते गये पर निर्णय नहीं हो पाने के कारण यह उद्देश्य से भटकता रहा़ बताया जाता है कि छात्रावास पर एकाधिकार को लेकर मवि मऊबाजिदपुर व विद्यापति उवि में खींचातानी का प्रयास इसके अधोगति का सबब बना़ इसमें कुल छह कमरे, किचेन, चार शौचालय दो पठन रूम बनाये गये थे़ निर्माण के चार वर्ष बाद छात्रावास के देखरेख का जिम्मा मवि मऊबाजिदपुर को दिया गया़ इसमें उपस्करों की निगरानी का जिम्मा महत्वपूर्ण था़ इस ओर समुचित ध्यान नहीं दिये जाने के कारण उपस्करों की चोरी व बंदर बांट का सिलसिला जारी हुआ जो अंत: इसकी जर्जरता का कारण बना़ इस विशाल भवन का जीणार्ेद्घार यदि किया जाय तो नये भवन की की आवश्यकता को खारिज हीं नहीं किये जाने की संभावना है अपितु सरकारी कोष का बचत व स्कूली बच्चों के पठन पाठन की कमियों को दूर किया जा सकेगा़
उद्देश्य से दूर हो जर्जर हुआ दलित छात्रावास
विद्यापतिनगर. दलित छात्रों के कल्याण के लिये वषार्ें पूर्व बना छात्रावास उद्देश्य से भटक कर जर्जरता का शिकार हुआ है़ भवन सहित लाखों के उपस्कर कालकवलित हो गये़ इसे लेकर मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1980 में ग्यारह लाख की लागत से दलित छात्रावास का निर्माण कराया गया था़ इसके अलावे लगभग पांच लाख रुपये […]
