अपहर्ताओं ने मां को इलाहाबाद के एक चकलाघर में बेच दिया था
चकलाघर से मुक्त होने के बाद से पुत्रों की तलाश में भटक रही महिला
समस्तीपुर : अपहरण के सात वर्ष बाद भी अपहृत बच्चों का जिला पुलिस सुराग नहीं ढ़ूंढ़ पायी है. शायद अब तो उसकी केस फाइल पर धूल जम चुकी होगी. सिर्फ कागजों पर अनुसंधानकर्ता बदलते जा रहे हैं लेकिन अनुसंधान जस का तस है. परिजनों की माने, तो पुलिस तो लगभग इस घटना को भूल चुकी है. लेकिन वह मां उन बच्चों को कैसे भूल जाये, जिसे नौ माह तक अपना खून पिलाकर उसे जन्म दिया था.
उस मां को आज भी उम्मीद है कि पुलिस एक न एक दिन उसके बच्चों को जरूर ढूंढ निकालेगी. इस आशा को लिये वह दर-दर भटक रही है. लेकिन उसे आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा है. पीड़ित महिला मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र की रहने वाली बतायी जाती है. जो पिछले सात वर्षों से अपने पुत्रों की तलाश में भटक रही है.
बच्चों के साथ गायब हुई थी महिला
सात वर्ष पूर्व 23 मार्च, 2012 को अपने8 वर्षीय पुत्र मिथिलेश एवं 5 वर्षीय पुत्र अभिषेक को इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल लेकर आयी थी. लेकिन, यहां मौजूद जिस्म के सौदागरों ने नशा देकर उसे बच्चों के साथ अगवा कर लिया था. बताया जाता है कि अपहर्ताओं ने मां को तो इलाहाबाद मीरगंज के रेड लाइट एरिया स्थित एक चकलाघर में बेच दिया था.
जहां महिला द्वारा जिस्म के धंधे में उतरने से मना कर देने पर अपहर्ताओं ने उसके बच्चे को गायब कर दिया. इसके बाद से उसके दोनों पुत्र कहां हैं इसकी किसी को जानकारी नहीं.
