कड़ाके की ठंड ने लोगों का जीना किया मुहाल

कड़ाके की ठंड ने लोगों का जीना किया मुहाल

अगले तीन दिनों तक ठंड बढाने की संभावना, अलाव की व्यवस्था नहीं रहने से गरीबों की बढ़ी परेशानी सहरसा . जिले में कड़ाके की ठंड का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले दस दिनों से अधिक समय से ठंड उफान पर है. यह कम होने बजाय बढ़ता जा रहा है. जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है. साथ ही इसका असर फसलों पर भी पड़ने लगा है. तामपान जहां न्यूनतम 10 डिग्री तक जा पहुंचा है. वहीं इस पर बह रही पछुआ हवा से गरीबों का जीना कठिन हो गया है. सरकारी राहत के नाम पर शहरी क्षेत्र में अब तक कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. रविवार को भी पूरे दिन कुहासे का साम्राज्य रहा. गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गयी. सूर्य भगवान के दर्शन तक लोगों को नहीं हो पा रहे हैं. शाम होते ही सर्द हवा जानलेवा साबित हो रही है. इतने कड़ाके की ठंड के बाद भी जिला प्रशासन अब तक सुस्त पड़ा है. शहरी क्षेत्र में कहीं सरकारी अलाव की व्यवस्था अब तक नहीं दिख रही है. वहीं मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक कड़ाके की ठंड की संभावना जतायी है. आलू की फसल में पाला लगने से समय से पूर्व ही पौधे सूखने लगे हैं. इधर सूखते फसल को देख किसानों में मायूसी छा गयी है. वहीं गेहूं की फसल को बढ़ते ठंड से काफी लाभ पहुंचा है. जबकि मक्का, चना, मसूर व सरसों की फसल को क्षति पहुंची है. सरकारी व्यवस्था नदारद बढ़ती ठंड को लेकर कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं होने से गरीबों की परेशानी बढ़ती दिख रही है. शहरी क्षेत्र में किसी चौक-चौराहे पर अलाव तक की व्यवस्था तक नहीं की गयी है. जिससे चौक-चौराहे पर खडे रिक्शा चालक, ई रिक्शा चालक, खेमचे व ठेले पर सामान बेचने वालों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. वहीं मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक कड़ाके की ठंड की संभावना जतायी है. पछुआ हवा से बढ़ी परेशानी पहले दस दिनों के बीच मात्र गुरुवार को धूप खिलने से आम लोगों को थोड़ी राहत मिली थी. लेकिन उसके बाद फिर से लगातार सूर्य भगवान के दर्शन तक नहीं हो पा रहे हैं. वहीं पछुआ हवा के कारण बढ़ी ठंड ने लोगों को घरों में कैद कर दिया. अन्य दिनों की भांति सड़कों पर आवाजाही काफी कम रही. जिला प्रशासन की ओर से अलाव की व्यवस्था नहीं होने से गरीबों की मुसीबत दोगुनी हो गयी है. किसी तरह चौक चौराहे पर लोगों द्वारा अलाव जला ठंड को दूर करने का प्रयास जारी है.

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By Dipankar Shriwastaw

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