अब दियरा इलाके में बंदूक की गोलियों की आवाज नहीं बल्कि यूपी के किसानों की दिखती है मेहनत

यूपी के किसानों की दिखती है मेहनत

बंजर व रेतीली बालू पर यूपी के किसान खीरा सहित अन्य सब्जियों की कर रहे खेती लाखों की हो रही आमदनी सहरसा . जिले के दियारा क्षेत्र में इन दिनों खीरा की खुशबू से पूरा इलाका महक रहा है. इस इलाके में प्रवेश करते ही हर तरफ खीरा की खेती नजर आयेगी. बंजर जमीन पर यूपी के किसान मेहनत करते दिखेंगे. दरअसल यह नजारा जिले के नवहट्टा प्रखंड का है. जहां दियारा क्षेत्र की बंजर जमीन एवं रेतीली बालू पर यूपी के किसान खीरा सहित अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इस खेती से ना केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि यहां का खीरा कई मंडियों तक पहुंचता है. यह वही इलाका है, जहां कभी लोग आने से कतराते थे. जहां कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी. लेकिन अब इस इलाके में बंदूक की गोलियों की आवाज नहीं बल्कि यूपी के किसानों की मेहनत दिखती है. बंजर जमीन पर बनी हरियाली बंजर जमीन पर हरियाली व सब्जियों की खुशबू फैलती है. अब इस जगह पर लोग बेझिझक आकर खीरा की खरीदारी करते हैं. सबसे खास बात यह है कि बिना डर के किसान इस जगह पर जमीन लीज पर लेकर कई महीनों तक कड़ी मेहनत कर कई सब्जियों की खेती करते हैं. यूपी के किसान लगभग 50 एकड़ में समूह बनाकर खीरा व कद्दू के साथ अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के श्यामली जिले से आए किसान सोनू ने बताया कि वे लोग खीरा की खेती कर रहे हैं. यहां पर हमें डर नहीं लगता है. वे परिवार के साथ रहते हैं. 50 एकड़ में खीरा सहित अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं. एक एकड़ में 90 हजार से एक लाख की लागत आती है एवं मुनाफा दोगुना हो जाता है. दियारा क्षेत्र का खीरा एवं सब्जी कई मंडियों में जाती है. हर साल वे यहां आते हैं एवं जमीन लीज पर लेकर खेती करते हैं. एक बीघा पर 25 हजार रुपये में जमीन लीज पर लेकर खेती करते हैं. एक सौ परिवार यहां रहकर खेती कर रहे हैं. लगभग छह महीने का समय बीत जाता है. नवंबर महीने में वे लोग इस जगह पर आ जाते हैं. खीरा को तैयार होने में लगभग 50 दिन लगते हैं.

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By Dipankar Shriwastaw

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