अब डिग्री की पढ़ाई के लिए बाहर जाने की नहीं पड़ेगी जरूरत

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को डिग्री की पढ़ाई के लिए बाहर जाने की मजबूरी खत्म करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा हर प्रखंड में एक डिग्री महाविद्यालय स्थापित करने की पहल की जा रही है.

डिग्री महाविद्यालय की मंजूरी से सौरबाजार के लोगों में खुशी

भवन, शिक्षक और सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं रहने से आ सकती है समस्या

छत्री कुमार, सौरबाजार

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को डिग्री की पढ़ाई के लिए बाहर जाने की मजबूरी खत्म करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा हर प्रखंड में एक डिग्री महाविद्यालय स्थापित करने की पहल की जा रही है. इसी कड़ी में सौरबाजार नगर पंचायत में संचालित राजकीयकृत 2 उच्च विद्यालय को डिग्री कॉलेज में अपग्रेड करने की मंजूरी दी गयी है. शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार आगामी शैक्षणिक सत्र से यहां स्नातक स्तर पर नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जायेगी और यह महाविद्यालय भूपेंद्र मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से संबंध रहेगा. कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों संकायों की यहां पढ़ाई होगी. वर्तमान समय में विद्यालय में आठ शौचालय, दो चापाकल और पेयजल के लिए एक आरओ उपलब्ध है. इस निर्णय से क्षेत्र के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में खुशी का माहौल है, क्योंकि अब उन्हें डिग्री की पढ़ाई के लिए दूरदराज के शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा. हालांकि जमीनी हकीकत इस उत्साह के बीच कई गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है.

लगभग छह एकड़ भूमि में फैले इस विद्यालय में वर्तमान समय में मात्र तीन भवन मौजूद हैं, जिनमें कुल 12 बड़े और 3 छोटे कमरे हैं. इन कमरों में से एक कार्यालय, एक शिक्षक कक्ष, एक पुस्तकालय, एक स्मार्ट क्लास और एक प्रयोगशाला के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि शेष 8 कमरों में कक्षा 9 से 12वीं तक की पढ़ाई संचालित होती है. विद्यालय में लगभग 800 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और 18 शिक्षक कार्यरत हैं. ऐसे में मौजूदा संसाधनों के बीच ही पढ़ाई का संचालन किसी तरह किया जा रहा है. जब नामांकित सभी छात्र-छात्राएं विद्यालय में उपस्थित रहती है तो विद्यालय प्रबंधन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है. विद्यालय की सबसे बड़ी शैक्षणिक समस्या यह है कि दो स्तर पर विज्ञान विषय के लिए एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है. इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.

यदि इस विद्यालय में बिना नये भवन निर्माण और संसाधनों की व्यवस्था किए ही स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू कर दी जाती है तो छात्रों और शिक्षकों दोनों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. पहले से ही सीमित कमरों में संचालित कक्षाओं के बीच उच्च शिक्षा के लिए जगह और संसाधन जुटाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.

विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय

विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है. विद्यालय की चहारदीवारी कई जगहों से टूटी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों द्वारा जमीन पर अतिक्रमण किया जा रहा है. इससे विद्यालय संचालन में भी लगातार बाधा उत्पन्न होती रहती है. प्रधानाध्यापिका शीला कुमारी द्वारा इस समस्या को लेकर शिक्षा विभाग के जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है. चहारदीवारी टूटी होने के कारण विद्यालय परिसर में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का आना-जाना लगा रहता है. इस कारण यहां पढ़ने वाली छात्राएं और महिला शिक्षिकाएं विशेष रूप से असहज महसूस करती हैं. स्थानीय थाना में भी कई बार इसकी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है. ऐसे माहौल में शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होना स्वाभाविक है. एक ओर जहां डिग्री कॉलेज की मंजूरी से क्षेत्र में शिक्षा के नये अवसर खुलने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर आधारभूत सुविधाओं की कमी, शिक्षकों की अनुपलब्धता और सुरक्षा संबंधी समस्याएं इस पहल की सफलता पर सवाल खड़े कर रही है.

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By Dipankar Shriwastaw

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