सहरसा से आशीष कुमार सिंह की रिपोर्ट: थाना क्षेत्र के अति संवेदनशील कोसी इलाके में स्थित ‘सुगमा पुलिस कैंप’ इन दिनों खुद प्रशासनिक बदहाली और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. जमीनी हालात यह हैं कि जिस कैंप के भरोसे क्षेत्र के दर्जनों गांवों और दो प्रमुख व्यस्त चौकों की सुरक्षा टिकी है, वहां फिलहाल महज एक लाचार जवान के सहारे पूरी सुरक्षा व्यवस्था घिसट रही है. ऐसे में आम लोगों की सुरक्षा पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिए जाने का गंभीर सवाल उठने लगा है.
शाम ढलते ही चौक पर सजती है महफिल, डरे हैं दुकानदार
स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों का कहना है कि सुगमा चौक एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल न होने के कारण शाम ढलते ही यहां असामाजिक व अपराधी प्रवृत्ति के लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है. बाजार में पुलिस कैंप की भौतिक मौजूदगी होने के बावजूद सुरक्षा बल न होने से दुकानदार और राहगीर खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. क्षेत्र में छोटी-बड़ी चोरी और छिनतई की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल और अधिकारियों की कमी के कारण अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है.
जर्जर भवन और खुले आसमान के नीचे पड़े हैं जब्त सामान
कैंप की आंतरिक स्थिति भी बेहद चिंताजनक है:
- भवन बदहाल: पुलिस कैंप का सरकारी भवन पूरी तरह जर्जर हालत में पहुंच चुका है, जिससे बरसात के दिनों में जवानों को रहने में भारी कठिनाई होती है.
- बाउंड्री गायब: पूरे परिसर की घेराबंदी (बाउंड्री वॉल) तक नहीं हुई है, जिसके कारण विभिन्न मामलों में पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहन और अन्य कीमती सामान खुले मैदान में लावारिस पड़े हैं. ग्रामीणों को डर है कि यदि समय रहते सुरक्षा दुरुस्त नहीं की गई, तो कैंप परिसर से ही सरकारी या जब्त सामानों की चोरी हो सकती है.
अफसर हटे तो सिर्फ नाम का रह गया कैंप
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, जब इस कैंप की स्थापना हुई थी, तब यहां तीन पुलिस पदाधिकारियों (अफसरों) की तैनाती की गई थी. शुरुआती दिनों में पुलिस की सक्रियता काफी बेहतर थी; नियमित रूप से संध्या गश्ती (नाइट पेट्रोलिंग) होती थी, चौक पर चेक पोस्ट लगाया जाता था और सघन वाहन जांच अभियान भी चलता था. लेकिन जैसे-जैसे समय के साथ यहां से अधिकारी हटते गए, यह कैंप सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गया. अब स्थिति यह है कि बिना किसी नेतृत्व (पदाधिकारी) के अकेला जवान अपनी ड्यूटी तो निभा रहा है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करता है.
अपराध और शराब तस्करी का पुराना रूट
यह कैंप सिर्फ सुगमा चौक ही नहीं, बल्कि रसलपुर चौक समेत आधा दर्जन गांवों की सुरक्षा का मुख्य केंद्र बिंदु है. मुरली-सुगमा और सिमरी बख्तियारपुर-सोनवर्षा को जोड़ने वाला यह मार्ग भौगोलिक दृष्टि से पहले से ही अति संवेदनशील माना जाता रहा है. इसी रास्ते से अंतर-जिला शराब तस्करी और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. पूर्व में इस मार्ग से हथियार के साथ अपराधियों की गिरफ्तारी और भारी मात्रा में विदेशी व देशी शराब की बरामदगी भी हो चुकी है.
एसपी हिमांशु से गुहार: समय रहते जाग जाए सिस्टम
इतनी संवेदनशील जगह पर पुलिस व्यवस्था का इस कदर कमजोर होना सीधे तौर पर पुलिस मुख्यालय की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है. रसलपुर, लालपुर, ठढिया, अंबाडीह, सुगमा, प्रियनगर मुरली, बहुअरबा समेत पड़ोसी खगड़िया जिले के कैंजरी और नौनहा गवास जैसे गांवों के हजारों लोगों ने इस बदहाली पर गहरी चिंता जताई है. स्थानीय दुकानदारों, मुखिया और प्रबुद्ध ग्रामीणों ने सहरसा के पुलिस अधीक्षक (SP) हिमांशु से सुगमा पुलिस कैंप में अविलंब जिम्मेदार अधिकारियों और अतिरिक्त पुलिस बल (जवानों) की स्थाई तैनाती करने की पुरजोर मांग की है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो क्षेत्र में किसी बड़ी आपराधिक वारदात के बाद सिर्फ अफसोस ही हाथ लगेगा.
