छात्र, युवाओं को सरकार की गलत नीतियां के विरोध के लिए आगे आना होगा: शंकर

छात्र, युवाओं को सरकार की गलत नीतियां के विरोध के लिए आगे आना होगा: शंकर

यूजीसी रेगुलेशन बिल एक बहाना है सहरसा . एआईएसएफ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य शंकर कुमार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विश्वविद्यालय के केंपसों में ओबीसी, एससी-एसटी के छात्राओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए बनाये गये यूजीसी रेगुलेशन बिल जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोहित वेमुला, पायल तड़वी के मामले में सुनवाई करते निर्देशित किया था. विश्वविद्यालय कैंपस महाविद्यालय केंपसों में ओबीसी, एससी-एसटी के साथ भेदभाव रोकने के लिए इस तरह कानून बनाया जाये. उसके बाद भारत सरकार ने यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन 2026 को लागू किया. उसे सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी. उन्होंने कहा कि संगठन अविलंब इसे लागू करने की मांग करती है. उन्होंने कहा कि देश की सरकार साम्राज्यवादी एवं पूंजीवादी शक्तियों का गुलाम है. यह तो सिर्फ एक बानगी है. संविधान की मूल भावना के साथ साम्राज्यवादियों एवं पूंजीवादी शक्तियों के इशारों पर सरकार व देश की संस्था दुरुपयोग करती रही है. देश के छात्र, युवाओं को सरकार की गलत नीतियां जो आम जनता व छात्र एवं युवाओं का शोषण करती हो, उस नीतियों के विरोध के लिए आगे आना होगा. उन्होंने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन बिल 2026 को लागू करने को लेकर चल रहे आंदोलन में देश के इतिहास में पहली बार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के निर्वाचित छात्र संघ के प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया एवं जुर्माना लगा दिया. जिसका ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन विरोध करती है. उन्होंने कहा कि जेएनयू प्रशासन जेएनयू छात्र संघ पर किये गये दंडात्मक कार्यवाही वापस लेने की मांग करती है. यूजीसी रेगुलेशन बिल 2026 तो सिर्फ बहाना है. इसकी आड़ में विदेशी विश्वविद्यालय बिल जो लंबे दिनों तक लटका हुआ था. उस बिल को विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 में समाहित कर पास किया गया. जिसे दोनों सदनों में विरोध के बाद संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया. इसी तरह सर्वोच्च न्यायालय में कॉलेजियम सिस्टम के आधार पर होने वाले जजों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम के आधार पर अपने हितों को साधने के लिए की जाती है. उन्होंने कहा कि संगठन कॉलेजियम सिस्टम को समाप्त कर जजों की नियुक्ति के लिए न्यायिक सेवा भर्ती आयोग का गठन किये जाने की मांग करती है. यह आंदोलन इसी रेगुलेशन बिल, कॉलेजियम सिस्टम को निरस्त करने, न्यायिक सेवा भर्ती आयोग बनाने, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 वापस लेने एवं जेएनयू के निर्वाचित छात्र संघ के पदाधिकारी के ऊपर की गयी कार्यवाही को वापस लेने को लेकर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि संगठन छात्र, युवा संघर्ष समिति द्वारा चरणबद्ध आंदोलन का समर्थन करती है. उन्होंने जिला परिषद से निकलने वाली मशाल जुलूस में छात्र एवं युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की. फोटो – सहरसा 04 – शंकर कुमार

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >