गैस की किल्लत से चूल्हे पड़ रहे ठंढ़े, स्कूलों के होस्टलों पर पड़ा है बड़ा असर

गैस की किल्लत से चूल्हे पड़ रहे ठंढ़े,

शादी-विवाह व श्रद्ध के लिए लोग झेल रहे बड़ी समस्या होटलों में भी डिमांड के अनुसार नहीं मिल रहा गर्म भोजन छोटे चाय नाश्ता की दुकानें की संख्या में रोज आ रही कमी सहरसा . जिले में एलपीजी गैस आपूर्ति में कटौती के कारण कई गैस एजेंसियों में बैकलॉग आठ दिनों तक पहुंच गया है, जिससे उपभोक्ताओं में बेचैनी बढ़ गई है. हालांकि, जिला प्रशासन की सक्रियता और जिले की सभी 33 एलपीजी गैस वितरण एजेंसियों पर मजिस्ट्रेट की तैनाती से स्थिति फिलहाल कुछ हद तक सामान्य बनी हुई है.इसके बावजूद शादी-विवाह, श्राद्ध जैसे आवश्यक अवसरों पर गैस की उपलब्धता काफी कठिन हो गई है. मजबूरन लोगों को लकड़ी के जलावन का सहारा लेना पड़ रहा है. उचित व्यवस्था के अभाव में लोग ब्लैक में भी ऊंची कीमत चुकाने को विवश हैं.अब, जबकि 16 अप्रैल से विवाह का लगन शुरू होने वाला है, ऐसे में गैस की मांग और बढ़ेगी. जिन परिवारों में शादी-विवाह जैसे आयोजन हैं, वे अभी से गैस की व्यवस्था करने में जुटे हैं, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण काफी परेशान नजर आ रहे हैं.हालांकि, घरों में होम डिलीवरी की सुविधा से उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिल रही है. बुकिंग के बाद देर-सबेर उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर घर तक पहुंचाया जा रहा है. जिले में व्यवसायिक सिलिंडर के उपभोक्ता अपेक्षाकृत कम हैं, इसलिए उनके लिए आपूर्ति फिलहाल सामान्य बनी हुई है.सबसे अधिक परेशानी छोटे सिलिंडरों में गैस भरकर चौक-चौराहों पर चाय-नाश्ता बेचने वाले छोटे व्यवसायियों को हो रही है. पहले ये लोग 90 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से आसानी से गैस प्राप्त कर लेते थे, लेकिन अब 200 रुपये में भी गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे उनका व्यवसाय लगभग ठप हो गया है. जिले में ऐसे छोटे व्यवसायियों की संख्या हजारों में है, जो शहर के विभिन्न हिस्सों में अपना कारोबार चला रहे थे.वहीं, मध्यम और छोटे होटल-रेस्टोरेंट भी गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं. उन्हें मांग के अनुरूप गैस नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण उनके व्यवसाय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. शादी व श्राद्ध में हो रही बड़ी समस्या यूं तो शादी विवाह सालों भर चलता रहता है. लेकिन लग्न होने पर इसमें काफी इजाफा हो जाता है. पिछले एक महीने से लगन नहीं रहने से थोड़ी शांति जिले में थी. लेकिन आगामी 16 अप्रैल से लग्न शुरू हो रहा है. जबकि लगभग प्रतिदिन जिले में सैकडों की संख्या में शादी शुरू होगी. लड़के वालों के घरों से लेकर लड़की वालों के घरों में बड़ा उत्सव होगा. जहां सैकड़ों की संख्या में लोग जुटेंगे. इन सब के लिए गैस की जरूरत होगी. जो उपलब्ध नहीं है एवं गंभीर समस्या खड़ी कर रही है. अब देखना यह है कि इसके लिए जिला प्रशासन क्या व्यवस्था करती है. लोगों की निगाह जिला प्रशासन की ओर टिकी है. जबकि इस बाबत जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि अबतक सिर्फ घरों तक गैस उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. शादी-विवाह एवं श्राद्ध के लिए गैस की अलग से कोई व्यवस्था नहीं है. इस स्थिति में सिर्फ लकड़ी ही बचती है, जो इंधन की समस्या हल कर सकती है. बड़े परिवारों के सामने भी गैस की है समस्या गैस उपलब्धता का समय सीमा 25 एवं 45 दिन होने से ऐसे परिवार जहां पांच से छह लोग हैं, उनके आगे भी गैस की समस्या खड़ी हो गयी है. इन बड़े परिवारों में 20 से 22 दिन में एक सिलिंडर गैस की खपत होती है. शहरी क्षेत्र के इन परिवारों को गैस होम डिलवरी में कम से कम 30 से 35 दिन लग रहे हैं. जबकि शहरी क्षेत्र में अब लोगों को इतनी जगह नहीं है कि घरों में लकड़ी का चूल्हा जला सकें. ऐसे परिवार ब्लैक पर गैस के लिए कुछ भी राशि देने को तैयार हो जा रहे हैं. जिससे कुछ कालाबाजारी वाले इसका लाभ लेकर दो से तीन हजार में गैस सिलिंडर बेचते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में हालत सबसे खराब है. यहां कम से कम 50 से 55 दिनों में गैस उपलब्ध हो रहा है. जिसने समस्या खड़ी कर दी है. लोग खासे परेशान हैं. रेस्टूरेंट व ढाबे पर हो रहा असर कम जगहों में संचालित होटल, रेस्टूरेंट एवं ढाबे में गैस अनुपलब्धता का काफी असर पड़ा है. जिससे कुछ बंद होने के कागार पर हैं. कुछ बंद हो गये हैं. खास यह कि जो दुकानें 12 बजे रात्रि तक खुले रहते थे. वह अब 10 बजे से ही बंद होने शुरू हो जाते हैं. खास यह कि अब तत्काल मीनू के अनुसार शायद ही भोजन मिले. जो तैयार भोजन है, वही परोसा जाता है. मिठाइयों की वेरायटी में भी काफी कमी आयी है. बिक्री के अनुरूप ही मिठाई भी दुकानों पर मिल रहे हैं. जिससे लोगों की पसंद भी सीमित हो रही है. हाल यह है कि गैस की किल्लत से यह व्यवसाय ठंढ़ा पड़ गया है. छोटे व्यवसायी किसी तरह दिन काट रहे हैं. जबकि बड़े व्यवसायी दिन भर गैस का जुगाड़ करते नजर आते हैं. इसके लिए भी जिला प्रशासन ने पूरी तरह हाथ खड़ा कर रखा है. निजी स्कूलों के होस्टल पर गहरा असर गैस की किल्लत से शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूल होस्टलों पर गहरा असर पड़ा है. वार्षिक परीक्षा के बाद बंद होस्टल खोलने के लिए विद्यालयों को सोचना पड़ रहा है. कुछ बड़े निजी विद्यालय तो लकड़ी के जलावन के सहारे होस्टल संचालित कर रहे हैं. जबकि अन्य निजी स्कूलों के होस्टल बंद पड़े हैं. जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है. वहीं जिले में संचालित सरकारी विद्यालयों एवं कॉलेजों में प्राचार्य की मांग पर जिला प्रशासन गैस उपलब्ध करा रही है. लेकिन निजी विद्यालयों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि एमडीएम, आंगनबाड़ी, नवोदय, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज को मांग करने पर गैस उपलब्ध कराया जा रहा है. जबकि निजी विद्यालयों के होस्टलों के लिए प्रावधान नहीं होने से गैस उपलब्ध करना समस्या है. सिर्फ ऑनलाइन रजिस्ट्रर्ड की ही पंचिंग होने पर ही गैस कंपनी गैस उपलब्ध कराती है. जिससे किसी भी समारोह के लिए गैस उपलब्ध कराना बड़ी समस्या है. लकड़ी की भी बढ़ गयी मांग पहले जहां लकड़ी का जलावन किसी खास जरूरत पर ही काम आते थे. लेकिन उसकी आज डिमांड चारों ओर हो रही है. शादी विवाह का घर हो, होटल, रेस्टूरेंट हो या फिर घर हो, इसकी मांग हो रही है. जिसे देखते इसकी कीमत में भी धीरे-धीरे आग लग रही है. पहले छह सौ से सात सौ क्विंटल मिलने वाला जलावन आज एक हजार से कम में शायद ही उपलब्ध हो. जो कुछ अच्छे जलावन हैं, वह 12 सौ से 14 सौ रूपये क्विंटल तक बिक रहे हैं.

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By Dipankar Shriwastaw

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