गांवों में लगे सोलर स्ट्रीट लाइट महज कुछ महीने के बाद ही हो रहे खराब

रात के अंधेरे में रोशनी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया सोलर स्ट्रीट लाइट ने महज कुछ महीने बाद ही काम करना बंद कर दिया है.

सौरबाजार. शहर की तर्ज पर गांव और पंचायतों के हर मार्ग, गलियों और सार्वजनिक जगहों पर रात के अंधेरे में रोशनी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया सोलर स्ट्रीट लाइट ने महज कुछ महीने बाद ही काम करना बंद कर दिया है. प्रखंड के लगभग सभी पंचायतों में मुख्यमंत्री सोलर स्ट्रीट लाइट योजना से लगी स्ट्रीट लाइट पर गांव के लोगों का कहना है कि यह लाइट सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह यी है. ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में लगाये गये सोलर लाइटें रात के 8 बजते ही अपने-आप बंद हो जाती हैं, जबकि इनका उद्देश्य पूरी रात गांव की गलियों को रोशन रखना था. ग्रामीणों के अनुसार लाइट लगने से पहले उम्मीद थी कि अब रात में अंधेरा नहीं रहेगा, लेकिन हर दिन आठ बजे के बाद गलियां फिर अंधेरे में डूब जाती हैं. जानकारी के मुताबिक, एक सोलर स्ट्रीट लाइट की सरकारी लागत करीब 30 हजार रुपये बतायी जाती है, लेकिन इतनी बड़ी लागत के बावजूद लाइट का सही तरीके से काम नहीं करना सवाल खड़ा कर रहा है. लोगो का मानना है कि पंचायत में बिना नियमित निगरानी और मेंटेनेंस के ये सरकारी योजना सिर्फ कागज़ों पर चमकती हैं, जमीनी स्तर पर नहीं है. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि लाइट लगाने से लेकर बिल पास कराने तक पूरा काम बिना किसी जांच के किया गया. कई लाइटों में घटिया क्वालिटी के सोलर पैनल और कमजोर बैटरियों के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है. सौरबाजार प्रखंड के लगभग सभी पंचायतों के लोगों ने जिला के वरीय पदाधिकारी से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए और खराब सोलर लाइटों को दुरुस्त कराया जाए ताकि गांव की गलियां रात भर रोशन रहें.

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By Dipankar Shriwastaw

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