संगीत सेमिनार में गूंजी शास्त्रीय स्वर लहरियां, मेधावी छात्र हुए सम्मानित

सर्व नारायण सिंह राम कुमार सिंह (SNS RKS) महाविद्यालय के स्नातकोत्तर संगीत विभाग द्वारा मंगलवार को 'सेमिनार-सह-सम्मान समारोह' (सत्र 2024-2026) का भव्य आयोजन किया गया. भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU), मधेपुरा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने संगीत, दर्शन और योग के गहरे अंतर्संबंधों को उजागर किया.

सहरसा से दीपांकर की रिपोर्ट:

सर्व नारायण सिंह राम कुमार सिंह (SNS RKS) महाविद्यालय के स्नातकोत्तर संगीत विभाग द्वारा मंगलवार को ‘सेमिनार-सह-सम्मान समारोह’ (सत्र 2024-2026) का भव्य आयोजन किया गया. भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU), मधेपुरा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने संगीत, दर्शन और योग के गहरे अंतर्संबंधों को उजागर किया.

संगीत और योग से व्यक्तित्व विकास पर चर्चा

कार्यक्रम के मुख्य सत्र में “भारतीय शास्त्रीय संगीत का मानव जीवन पर प्रभाव” तथा “संगीत, योग, साहित्य और दर्शन” जैसे गंभीर विषयों पर संगोष्ठी आयोजित की गई. मुख्य वक्ताओं ने तर्क दिया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल कानों को सुख देने वाली कला नहीं है, बल्कि यह एक थेरेपी की तरह काम करता है जो मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. वक्ताओं ने संगीत को आत्मिक शांति और अनुशासन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग बताया.समारोह का उद्घाटन बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. डॉ. अशोक कुमार सिंह, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनंत कुमार सिंह, संगीत विभागाध्यक्ष प्रो. गौतम कुमार सिंह और सहरसा की महापौर बेन प्रिय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

कुलसचिव डॉ. अशोक सिंह ने कहा कि संगीत के विद्यार्थियों को इस कला की गहराई को समझने के लिए निरंतर अभ्यास (रियाज) पर ध्यान देना चाहिए.व प्राचार्य डॉ. अनंत सिंह ने संगीत विभाग की सक्रियता की सराहना करते हुए इसे कॉलेज की बड़ी उपलब्धि बताया.

सम्मान समारोह और पुस्तिका विमोचन

इस अवसर पर शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया, जिससे छात्रों में भारी उत्साह देखा गया. साथ ही, संगीत की बारीकियों पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया गया, जो आगामी शोधार्थियों और छात्रों के लिए सहायक सिद्ध होगी.

मंच का संचालन डॉ. आर्य सिंधु ने अपनी चिरपरिचित शैली में किया. पारंपरिक साजों (हारमोनियम, तबला) से सजे मंच पर विद्यार्थियों ने शास्त्रीय और सुगम संगीत की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि संगीत ही वह कड़ी है जो समाज को संवेदनशीलता और सद्भाव से जोड़ती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shruti Kumari

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >