सहरसा में खुले नाले से हादसे का खतरा, सुरक्षा व्यवस्था नहीं

Saharsa news: यह सड़क शहर के व्यस्त मार्गों में शामिल है, जहां दिन-रात छोटे-बड़े वाहन, स्कूली छात्र-छात्राएं, बाइक सवार और पैदल लोग आवाजाही करते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, नाले के ऊपर पुल तो बना दिया गया है, लेकिन उसके किनारे रेलिंग नहीं होने से खतरा लगातार बना रहता है.

सहरसा से विनय कसौधन की रिपोर्ट:

Saharsa news: सहरसा नगर निगम क्षेत्र के पालिटेक्निक ढाला बायपास सड़क से सटे संप हाउस तक बने नाले के किनारे सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहने से लोगों में हादसे का डर बना हुआ है. सड़क के बिल्कुल किनारे करीब 15 फीट गहरा नाला होने के बावजूद अब तक वहां रेलिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया है.

यह सड़क शहर के व्यस्त मार्गों में शामिल है, जहां दिन-रात छोटे-बड़े वाहन, स्कूली छात्र-छात्राएं, बाइक सवार और पैदल लोग आवाजाही करते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, नाले के ऊपर पुल तो बना दिया गया है, लेकिन उसके किनारे रेलिंग नहीं होने से खतरा लगातार बना रहता है.

लोगों ने बताया कि सड़क किनारे कई जगहों पर हिस्सा टूटा हुआ है, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ गई है. बारिश के दिनों में जलभराव और फिसलन के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है. रात में पर्याप्त रोशनी नहीं रहने से बाहर से आने वाले लोगों को नाले की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता.

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बाइक सवार और राहगीर दुर्घटना का शिकार होते-होते बचे हैं. नगर निगम को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

लोगों ने मांग की है कि नाले के किनारे जल्द मजबूत रेलिंग लगाई जाए और सड़क किनारे सुरक्षा संकेतक लगाए जाएं, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >