सहरसा से नीरज कुमार वर्मा की रिपोर्ट
Saharsa News: सहरसा शहर की सर्वा ढाला रेलवे फाटक से मधेपुरा मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण बाइपास सड़क जलजमाव की गंभीर समस्या से जूझ रही है. सड़क पर दो से तीन फीट तक जमा पानी के कारण यह मार्ग तालाब में तब्दील हो गया है. हालात इतने खराब हैं कि बाइक सवारों से लेकर बड़े वाहनों के चालकों तक को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पुरानी इस समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है.
सड़क नहीं, बन गया है पानी का रास्ता
सर्वा रेलवे फाटक पार करते ही बाइपास सड़क पर जलजमाव का नजारा शुरू हो जाता है. सड़क पर जमा पानी के कारण पुराने गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे वाहन चालक अक्सर दुर्घटना का शिकार होते हैं. बाइक सवार गिरते-संभलते किसी तरह रास्ता पार कर रहे हैं, जबकि कई वाहन पानी में छिपे गड्ढों में फंस जा रहे हैं.
पैदल चलना भी बना चुनौती
जलजमाव का असर सिर्फ वाहनों पर नहीं, बल्कि पैदल राहगीरों पर भी पड़ रहा है. सड़क पार करने के लिए लोगों को पानी के बीच से गुजरना पड़ता है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामूली बारिश के बाद भी यह सड़क जलमग्न हो जाती है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है.
नगर निगम क्षेत्र में होने के बावजूद नहीं मिला समाधान
स्थानीय लोगों के अनुसार यह पूरा इलाका नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इसके बावजूद जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है. बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, जबकि साल के अन्य महीनों में भी यहां पानी जमा रहता है.
कई जिलों की लाइफलाइन है यह बाइपास
करीब 1600 मीटर लंबी यह सड़क सहरसा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसी मार्ग से सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा कचहरी, मधेपुरा, मुरलीगंज, बिहारीगंज, पूर्णिया और कटिहार जाने वाले हजारों वाहन गुजरते हैं. यह सड़क शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम करने में भी अहम भूमिका निभाती है.
ड्रेनेज सिस्टम से मिल सकती है राहत
स्थानीय लोगों का मानना है कि रेलवे और नगर निगम को मिलकर स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करना चाहिए. उनका कहना है कि समस्तीपुर रेल मंडल के कई इलाकों में ऐसी व्यवस्था सफल रही है. यदि सर्वा ढाला क्षेत्र में भी जलनिकासी की आधुनिक व्यवस्था बनाई जाए तो वर्षों पुरानी इस समस्या से लोगों को राहत मिल सकती है.
