सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa News: कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) अगवानपुर द्वारा संचालित खेत बचाओ अभियान के तहत गुरुवार को देवना भरना मुसवासी गांव में प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बदलते मौसम और घटती भूमि उर्वरता के बीच वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी.
किसानों को बताई गई मिट्टी बचाने की तकनीक
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पासवान ने किसानों को खेतों की उर्वरता बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. ऐसे में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग और जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की जरूरत है.
प्राकृतिक खेती और जैविक उपायों पर दिया जोर
डॉ. पासवान ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभों से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर समेकित कीट प्रबंधन तकनीक अपनाने से लागत घटेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा. इससे मिट्टी की सेहत बेहतर होगी और फसल उत्पादन में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा.
मौसम आधारित खेती से बढ़ेगा लाभ
कार्यक्रम के दौरान किसानों को मौसम आधारित खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी भी दी गई. विशेषज्ञों ने बताया कि मौसम के अनुरूप फसल चयन और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से जोखिम कम होता है और किसानों की आय बढ़ सकती है.
किसानों की समस्याओं का भी हुआ समाधान
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों ने खेती से जुड़ी अपनी समस्याएं भी रखीं. कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न फसलों में रोग, कीट प्रबंधन, उर्वरक उपयोग और जल संरक्षण से जुड़े सवालों के जवाब दिए. किसानों ने इस पहल को उपयोगी बताते हुए नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की.
टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की पहल
कृषि विज्ञान केंद्र अगवानपुर द्वारा चलाया जा रहा खेत बचाओ अभियान क्षेत्र में किसानों को जागरूक करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है.
