सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa Industrial Development: कोसी क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. बिहार मंत्रिमंडल ने सहरसा जिले के कहरा अंचल स्थित बनगांव और देवनागोपाल मौजा में 420.625 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए 88.01 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है. इस परियोजना के तहत विकसित होने वाला औद्योगिक क्षेत्र न केवल सहरसा बल्कि पूरे कोसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है.
सरकार के इस फैसले के बाद सहरसा में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. लंबे समय से औद्योगिक विकास की राह देख रहे जिले के युवाओं के लिए यह खबर किसी बड़े अवसर से कम नहीं मानी जा रही है.
कोसी क्षेत्र को मिलेगी नई आर्थिक ताकत
भूमि अधिग्रहण का कार्य बिहार आधारभूत संरचना विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाएगा. औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद यहां विभिन्न प्रकार की औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं का पलायन भी कम हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योग स्थापित होने से परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल, व्यापार और सेवा क्षेत्र में भी तेजी आएगी. इसका लाभ आसपास के जिलों को भी मिलेगा.
प्रशासन की प्राथमिकताओं का दिखा असर
जिला प्रशासन के अनुसार सहरसा में पदस्थापन के बाद जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. जिले में विभिन्न विकास परियोजनाओं की लगातार निगरानी और राज्य सरकार के समक्ष औद्योगिक निवेश की आवश्यकता को मजबूती से रखने का सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है.
रेलवे ओवरब्रिज, पूरब बाजार ढाला पर यातायात सुधार, एनएच-327ई और एनएच-107 से जुड़े विकास कार्यों को भी इस व्यापक विकास दृष्टि का हिस्सा माना जा रहा है.
हजारों रोजगार सृजन की उम्मीद
औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है. स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी.
जिला प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए बिहार सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना सहरसा को बिहार के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी.
