असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है सदर अस्पताल

असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है सदर अस्पताल

प्रभात फाॅलोअप सहरसा. जिला का पीएमसीएच कहे जाने वाला मॉडल अस्पताल इन दिनों मरीजों के इलाज के बजाय असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है. गुरुवार को दिनदहाड़े सदर अस्पताल परिसर में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के प्रयास की घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है. घटना के बाद मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है. सवाल यह है कि जिस अस्पताल को आमजन के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, वहां इस तरह की घटना आखिर कैसे घट रही है. गुरुवार को अपनी दादी के साथ इलाज के लिए अस्पताल आयी नाबालिग बच्ची के साथ युवकों द्वारा दुष्कर्म की कोशिश की गयी. घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गयी. आसपास मौजूद लोगों के शोर मचाने पर आरोपी वहां से फरार हो गया. लोगों ने एक आरोपित को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह भी लोगों की पकड़ से छूट कर भाग गया. घटना ने अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. लोगों ने बताया कि कि यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी सदर अस्पताल परिसर में इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं. लेकिन पीड़ितों द्वारा सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और प्रशासनिक उदासीनता के कारण मामलों को उजागर नहीं किया गया. इसी का नतीजा है कि अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं और वे खुलेआम अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान को अपना ठिकाना बना रहे हैं. लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है सुरक्षा व्यवस्था सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है. अस्पताल परिसर में दिनभर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. नशेड़ियों ने अस्पताल परिसर को अपना अड्डा बना लिया है. कई बार मरीजों के परिजनों ने खुलेआम शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते लोगों को अस्पताल परिसर में देखा है. शाम ढ़लते ही अस्पताल का माहौल और भी भयावह हो जाता है. जहां महिलाओं और बच्चियों काे अकेले आने-जाने में असुरक्षित महसूस होने लगता है. अस्पताल परिसर में बाइक चोरी की घटनाएं आम हो चुकी है. अब तक दर्जनों बाइक की चोरी हो चुकी है. लेकिन न तो चोरी की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लग पाया है और न ही अपराधियों में पुलिस का खौफ नजर आता है. इसके अलावा अस्पताल के विभिन्न वार्डों से मरीजों और उनके परिजनों के सामान चोरी होने के मामले भी कई बार सामने आ चुका है. मोबाइल फोन, नगदी और अन्य कीमती सामान चोरी होने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं. औपचारिकता तक सीमित नजर आती है प्राइवेट गार्डों की तैनाती इन सब घटनाओं के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है. सुरक्षा के नाम पर अस्पताल परिसर में प्राइवेट गार्डों की तैनाती की गयी है, लेकिन उनकी भूमिका महज औपचारिकता तक सीमित नजर आती है. लोगों ने बताया कि कुछ गार्डों की असामाजिक तत्वों से मिलीभगत है, जिसके सहयोग से बाइक की चोरी होती है. हाल ही में अस्पताल परिसर में हुई चोरी की एक बड़ी घटना में पुलिस ने चोरी के सामान के साथ कई चोरों को गिरफ्तार भी किया था. इसके बावजूद चोरी व अन्य आपराधिक घटनाओं पर रोक नहीं लग पाया है. सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां है. सदर अस्पताल में सुरक्षा के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. सीसीटीवी कैमरा, प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी, गार्डों के वेतन व अन्य व्यवस्थाओं पर मोटी रकम खर्च होती है. बावजूद इसके घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इससे अस्पताल प्रशासन और तैनात सुरक्षा एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है. मरीजों और उनके परिजन इलाज के लिए अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. खासकर महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के लिए अस्पताल परिसर सुरक्षित नहीं रह गया है. कई परिजनों ने बताया कि वे अपने बच्चों और महिलाओं को अकेले शौचालय या जांच कक्ष तक भेजने से डरते हैं.

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