बीते 10 जुलाई से जारी यह अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को छठे दिन में प्रवेश कर गया. जिला प्रशासन की बेरुखी से नाराज बिजलपुर पंचायत के पूर्व मुखिया संजीव कुमार विरोध स्वरूप टावर पर चढ़ गए और मांग पूरी न होने की स्थिति में ऊपर से कूदकर जान देने की चेतावनी दे डाली. इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद धरना स्थल पर भारी अफरा-तफरी और तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि छह दिन बीतने के बाद भी प्रशासनिक अमले का कोई नुमाइंदा सुध लेने नहीं पहुंचा है.
बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज जरूरी: सरोज यादव
विशनपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सह युवा नेता सरोज यादव के नेतृत्व, पूर्व मुखिया संजीव कुमार की अध्यक्षता तथा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मदन यादव के संचालन में यह आंदोलन चलाया जा रहा है:
- शैक्षणिक पिछड़ापन: नेताओं ने कहा कि सत्तरकटैया प्रखंड का पूर्वी इलाका आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से अत्यंत पिछड़ा है, जिसके कारण क्षेत्र के गरीब होनहार छात्र उच्च शिक्षा से महरूम रह जाते हैं.
- छात्राओं की फजीहत: स्थानीय स्तर पर डिग्री कॉलेज न होने और सुदूर जिलों/प्रखंडों में जाने की मजबूरी के कारण विशेष रूप से बेटियों की स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है.
मानकों पर खरा है मेनहा स्कूल, फिर भी उपेक्षा क्यों?
आंदोलनकारियों ने कॉलेज स्थापना के लिए प्रस्तावित स्थल की भौगोलिक और ढांचागत मजबूती के साक्ष्य सामने रखे हैं:
- पर्याप्त बुनियादी ढांचा: ग्रामीणों के अनुसार, महंथ सरयुग दास +2 उच्च विद्यालय, मेनहा डिग्री कॉलेज के संचालन से जुड़े सरकार के सभी अनिवार्य मानकों को पूरा करता है.
- जमीन और भवन उपलब्ध: परिसर में कॉलेज विस्तार के लिए पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है और वर्तमान में 14 कमरों का एक भव्य तीन मंजिला भवन भी निर्मित है. इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इसकी अनदेखी की जा रही है.
मांग पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे आंदोलनकारी
धरना स्थल पर मौजूद प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने एक सुर में सरकार को चेतावनी देते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है:
"प्रशासन और सरकार हमारी जायज मांग को हल्के में ले रही है. मेनहा में जब सब कुछ उपलब्ध है, तो कॉलेज खोलने में देरी क्यों की जा रही है? जब तक राज्य सरकार और शिक्षा विभाग यहां स्थायी डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक हमारा यह आंदोलन और संजीव जी का सत्याग्रह जारी रहेगा. किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी." — संजय साह, सुधांशु यादव, एडवोकेट अरुण यादव व समस्त आंदोलनकारी
इस बड़े आंदोलन और धरना स्थल पर मुख्य रूप से विष्णुदेव यादव, पप्पू यादव, बिपिन यादव, शत्रुघ्न यादव, पारस दीवाना, मुकेश यादव, रोहित चौधरी, बिरजून यादव, ललन सादा, पूर्व उपमुखिया मो. हारुण, शिवजी यादव, रमन यादव, भूपेंद्र यादव, शिवन ठाकुर और डब्लू कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मुस्तैद हैं.
