मरीज इलाज करायें या गाड़ी को देखे

संगठन ने अस्पताल में शुद्ध पेयजल की भयावह स्थिति को उजागर किया.

मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने सदर अस्पताल की कुव्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन सीएस, डीएस व सदर एसडीओ को ज्ञापन सौंप की कार्रवाई की मांग सहरसा मॉडल अस्पताल में व्याप्त गंभीर कुव्यवस्था विशेषकर पार्किंग, सुरक्षा दायित्व एवं शुद्ध पेयजल की कमी को लेकर मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने गुरुवार को संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा. संगठन ने अनुमंडल पदाधिकारी सदर, सिविल सर्जन एवं अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट को लिखित रूप में समस्याओं से अवगत कराते अविलंब ठोस कार्रवाई की मांग की. संगठन ने बताया कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले अधिकांश मरीज गरीब एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि से होते हैं. जिन्हें अस्पताल परिसर के बाहर वाहन पार्क करने को मजबूर किया जाता है. वहीं बड़े बोर्ड लगाकर वाहन, सामान की सुरक्षा से प्रशासन ने जिम्मेदारी से साफ इंकार कर दिया है. यह स्थिति मरीजों को दोहरी पीड़ा देती है. या तो इलाज करायें या बाहर खड़ी गाड़ी की सुरक्षा करें. वाहन चोरी की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह आज तक स्पष्ट नहीं किया गया है, जो प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है. इसके साथ ही संगठन ने अस्पताल में शुद्ध पेयजल की भयावह स्थिति को उजागर किया. कई बार अस्पताल में पानी उपलब्ध ही नहीं रहता है एवं जब पानी आता है तो पीने योग्य नहीं रहता है. जो मरीजों एवं उनके परिजनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. मॉडल अस्पताल में इस तरह की स्थिति ना केवल शर्मनाक है, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है. संगठन ने यह भी बताया कि अव्यवस्था के कारण आये दिन सुरक्षा गार्डों एवं आम जनता के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है. सुरक्षा कर्मी भी अपने दायित्वों से बंधे होते हैं. लेकिन प्रशासनिक असफलता का बोझ आम मरीज एवं सुरक्षाकर्मी दोनों को उठाना पड़ता है. इस मामले पर अनुमंडल पदाधिकारी श्रीयांश तिवारी ने समस्या के शीघ्र समाधान का सकारात्मक आश्वासन दिया. वहीं डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने इसे रोगी कल्याण समिति की बैठक में प्रस्ताव के रूप में रखने की बात कही. संगठन द्वारा सिविल सर्जन कार्यालय में भी औपचारिक आवेदन सौंपा गया. मौके पर टिंकू मैथिल ने कहा कि जल्द सुधार नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा. राष्ट्रीय सचिव रतन ने कहा कि यह पूरी व्यवस्था अमानवीय है एवं पीड़ित मरीजों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है. प्रशासन ने समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की तो निकट भविष्य में आंदोलन के साथ स्वास्थ्य मंत्री से सीधे संवाद किया जायेगा. अंकुश मिश्रा ने कहा कि संभवतः पूरे बिहार के जिला अस्पतालों में पार्किंग की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है. लेकिन सहरसा में व्यवस्था है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. ना कि बोर्ड लगाकर पल्ला झाड़ लिया जाये. मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा जनहित से जुड़ा है. प्रशासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करेगा. जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी. रौशन मिश्रा ने कहा कि मरीज इलाज करायें या गाड़ी को देखे यह व्यवस्था दुखद हैं. इसका निवारण होना चाहिए.

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By Dipankar Shriwastaw

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