Gupt Navratri 2026: आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 से होने जा रहा है. यह नौ दिवसीय पर्व 24 जुलाई को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि साधना, आध्यात्मिक उन्नति और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के साथ दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा के अनुसार श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से पूजा, व्रत और पाठ कर देवी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं.
कब से कब तक रहेगी गुप्त नवरात्रि
ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान एवं फाउंडेशन के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है.
इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 को विजयादशमी के दिन समाप्त होगी.
क्यों खास मानी जाती है गुप्त नवरात्रि
हिंदू धर्म में वर्षभर चार नवरात्रियां मनाई जाती हैं. इनमें चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रि को व्यापक रूप से मनाया जाता है, जबकि आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह नवरात्रि विशेष रूप से साधना, आध्यात्मिक अभ्यास और विशेष मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.
10 महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व
पंडित तरुण झा के अनुसार गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन सुबह और शाम मां दुर्गा की पूजा, आरती और देवी उपासना करनी चाहिए.
इन दिनों दस महाविद्याओं की साधना का भी विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक परंपराओं में इसे तंत्र साधना और गहन आध्यात्मिक अभ्यास के लिए भी शुभ माना जाता है.
इन धार्मिक ग्रंथों का पाठ माना जाता है शुभ
गुप्त नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है. कई श्रद्धालु इन नौ दिनों में नियमित रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर मां भगवती की आराधना भी करते हैं.
धार्मिक मान्यता क्या कहती है
धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा एवं साधना से धन, संतान सुख, शत्रु बाधा से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है.
हालांकि, यह आस्था और धार्मिक परंपराओं पर आधारित मान्यताएं हैं. श्रद्धालु अपनी परंपरा और विश्वास के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं.
Gupt Navratri 2026: साधना के साथ संयम का भी पर्व
धार्मिक विद्वानों के अनुसार गुप्त नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, ध्यान और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर है. इस दौरान सात्विक आहार, नियमित पूजा और सकारात्मक विचारों के साथ देवी उपासना करने की परंपरा रही है.
Also Read: भागलपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगा गंगाजल: 15 करोड़ की लागत से बिछेगी पाइपलाइन, अगले महीने होगा काम
