575 बकायेदार उपभोक्ताओं का किया गया बिजली कनेक्शन विच्छेद

575 बकायेदार उपभोक्ताओं का किया गया बिजली कनेक्शन विच्छेद

125 यूनिट मुफ्त बिजली के बावजूद बकाया रखने वालों पर विभाग बरत रही सख्ती सहरसा . जिले में बिजली बिल के बकायेदार उपभोक्ताओं के खिलाफ विद्युत विभाग ने सख्त रुख अपनाते कनेक्शन काटने की कार्रवाई तेज कर दी है. विभाग द्वारा राजस्व वसूली को लेकर लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत गांव-गांव व शहरी मोहल्लों में टीम भेजकर बकायेदार उपभोक्ताओं से बकाया बिजली बिल जमा करने की अपील की जा रही है. इस संबंध में विद्युत कार्यपालक अभियंता अमित कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा दी गयी है. इसके बावजूद कई उपभोक्ता अपने पुराने बकाया बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं. जिससे विभाग को राजस्व वसूली में कठिनाई हो रही है. उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने व विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए समय पर बिजली बिल का भुगतान आवश्यक है. बकाया रहने से विभाग को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिन उपभोक्ताओं पर 10 हजार रुपये से अधिक व शहरी क्षेत्रों में पांच हजार रुपये से अधिक बिजली बिल बकाया है, उनके खिलाफ कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा रही है. कनेक्शन कटने के बाद फिर से आपूर्ति बहाल कराने के लिए उपभोक्ताओं को निर्धारित रि-कनेक्शन शुल्क देना होगा. जिसमें सिंगल फेज के लिए एक सौ रुपये एवं तीन फेज छोटे उद्योगों के लिए नौ सौ रुपये निर्धारित है. इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है. जो नियमित रूप से क्षेत्रों में जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि 15 मार्च तक चलाए गये अभियान के दौरान 575 बकायेदार उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन विच्छेद किया गया है. जबकि दो हजार 955 उपभोक्ताओं ने बकाया राशि का भुगतान किया है. इसके साथ ही चालू माह में 69 लोगों के विरुद्ध बिजली चोरी की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. उन्होंने कहा कि मुख्यालय द्वारा मार्च माह में सभी प्रशाखाओं को कम से कम 25 प्राथमिकी दर्ज करने का लक्ष्य दिया गया है. उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे जल्द से जल्द अपना बकाया बिजली बिल जमा करें. जिससे कनेक्शन कटने जैसी असुविधा से बचा जा सके. विभाग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है.

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By Dipankar Shriwastaw

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