उदयमान सूर्य को अर्घ देने के साथ चैती छठ हर्षोल्लास के साथ संपन्न
सहरसा. सुबह के अर्घ के साथ आस्था का महापर्व चैती छठ बुधवार को संपन्न हो गया. शहरी क्षेत्र में धीरे-धीरे चैती छठ मनाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. शंकर चौक मंदिर परिसर स्थित छठ घाट पर श्रद्धालुओं एवं व्रतियों को देखकर लग रहा था कि कार्तिक महीने की तरह ही संध्या अर्घ एवं उदयमान सूर्य के अर्घ की तरह ही श्रद्धालुओं एवं व्रतियों की भीड़ उमड़ी रही. हालांकि शहरी क्षेत्र में मात्र शंकर चौक मंदिर परिसर स्थित पोखर में ही चैती छठ का आयोजन किया गया, जबकि घरों में भी छठी माता की पूजा की गयी. शहरी क्षेत्र में अधिकांश श्रद्धालु शंकर चौक स्थित मंदिर पोखर पर छठ मनाया. इस दौरान परिजनों ने उदयमान सूर्य को अर्घ दिया. विधि-विधान से सूर्योपासना एवं अर्घ के बाद व्रतियां व श्रद्धालु अपने-अपने घरों की ओर लाैटे.लोक आस्था का महापर्व छठ का शुभारंभ रविवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ था. इसके अगले दिन 23 मार्च को खरना का व्रत था. खरना पूजा के बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हुआ. मंगलवार के शाम छठ घाटों पर व्रतियों ने अस्तांचलगामी सूरज को अर्घ दिया, जबकि बुधवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ के बाद यह पर्व संपन्न हो गया. छठ व्रतियां हाथ में सूप लिए पूजा में तल्लीन रही. अगल-बगल खड़े परिवार के सदस्य लोटे में जल एवं दूध भरकर सूर्य देवता को अर्घ दिया, जो पानी के अंदर नहीं पहुंच सके, वो सभी एक के पीछे एक कतार में खड़े हो गये. एक दूसरे को स्पर्श कर अर्घ देने की प्रक्रिया पूरी की. कोई पानी से तो कोई दूध से अर्घ देते दिखे. समितियों द्वारा श्रद्धालुओं को अर्घ्य के लिए गाय का दूध व अगरबत्ती भी दी गयी. छठ व्रतियों ने बताया कि पूरे नियम, निष्ठा, श्रद्धा, विश्वास एवं समर्पण के साथ छठ पर्व मनाया गया. उन्होंने कहा कि षष्ठी माता एवं सूर्य भगवान की कृपा से पूरे परिवार में सुख शांति, समृद्धि तथा धन्य धान व संतान की प्राप्ति होती है.
