सहरसा का बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर: सावन में जहां पूरी होती है हर मनोकामना

बिहार के सहरसा जिले में स्थित बाबा मटेश्वर धाम सावन के महीने में आस्था का केंद्र बन जाता है. यहां का स्वयंभू शिवलिंग भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करता है. सावन और महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु गंगाजल लेकर जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.

Aaj ka Darshan: सावन का महीना शुरू होते ही बिहार के प्राचीन शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ने लगता है. इन्हीं पवित्र धामों में एक है सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के काठो गांव स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर. यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि लोकआस्था, शिवभक्ति और धार्मिक विश्वास का जीवंत केंद्र माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भोलेनाथ अवश्य सुनते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं.

यही वजह है कि सावन और महाशिवरात्रि के दौरान आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज जिलों से भी हजारों श्रद्धालु बाबा मटेश्वर धाम पहुंचते हैं. मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठता है.

स्वयंभू शिवलिंग से जुड़ी है मंदिर की आस्था

स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा मटेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीनता और लोकविश्वास है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुआ था. तभी से यहां नियमित पूजा-अर्चना का क्रम लगातार जारी है.

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है. सुबह की मंगला आरती से लेकर देर शाम की आरती तक श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. ग्रामीणों का विश्वास है कि बाबा मटेश्वरनाथ की कृपा से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

Aaj ka Darshan: सावन में गंगाजल लेकर पहुंचते हैं हजारों कांवरिये

सावन महीने में बाबा मटेश्वर धाम का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है. प्रतिदिन सैकड़ों शिवभक्त गंगाजल लेकर बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.

विशेष रूप से मुंगेर जिले के छर्रापट्टी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुंचते हैं और पूरे सावन माह जलाभिषेक का क्रम जारी रहता है. इस दौरान मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

महाशिवरात्रि पर लगता है भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन

महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा मटेश्वर धाम का दृश्य बेहद आकर्षक होता है. हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा और रुद्राभिषेक किया जाता है.

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से यहां दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है. भजन-कीर्तन, शिव स्तुति और धार्मिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का विशेष अनुभव कराती हैं.

मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया जाता है. कई श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर बाबा को बेलपत्र, धतूरा और विशेष प्रसाद अर्पित करते हैं. शाम की आरती में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल होकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

धार्मिक पर्यटन के रूप में बढ़ रही पहचान

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाबा मटेश्वर धाम की पहचान धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी मजबूत हुई है. मंदिर परिसर में सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.

यहां आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा-अर्चना ही नहीं करते, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक शांति का भी अनुभव करते हैं. यही कारण है कि सावन के दौरान यह मंदिर सहरसा जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो जाता है.

भक्तों का अटूट विश्वास है कि बाबा मटेश्वर धाम से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता. सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई प्रार्थना यहां अवश्य स्वीकार होती है.

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लेखक के बारे में

Author: Vinay kumar mishra

Published by: Pratyush Prashant

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