आज का दर्शन: लोकआस्था और पशुधन रक्षा के देवता हैं बाबा कारू खिरहर, दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

महिषी प्रखंड का बाबा कारू खिरहर स्थान श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है, जहां श्रद्धालु पशुधन की रक्षा और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

सहरसा : महिषी प्रखंड स्थित बाबा कारू खिरहर स्थान लोकआस्था, श्रद्धा और धार्मिक विश्वास का प्रमुख केंद्र है. कोसी क्षेत्र सहित बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा कारू खिरहर की पूजा-अर्चना करते हैं तथा सुख-समृद्धि, पशुधन की रक्षा और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा के दरबार में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. श्रद्धालु यहां दुग्धाभिषेक कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

ग्रामीण आस्था का प्रमुख केंद्र

महिषी स्थित बाबा कारू खिरहर स्थान अपनी धार्मिक महत्ता, लोक परंपरा और ग्रामीण आस्था के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. प्रतिदिन यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को अद्भुत शांति और भक्ति का अनुभव होता है. सुबह और शाम होने वाली विशेष पूजा एवं आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर परिवार की सुख-शांति तथा पशुधन की रक्षा की प्रार्थना करते हैं.

पशुधन के रक्षक देवता के रूप में होती है पूजा

स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा कारू खिरहर को पशुधन और किसानों के रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है. विशेष अवसरों पर श्रद्धालु दूध, फूल और प्रसाद अर्पित कर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं. मंदिर परिसर का शांत और भक्तिमय वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है. हाल के वर्षों में श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता को लेकर कई विकास कार्य भी किए गए हैं.

विशेष अवसरों पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

विशेष पूजा, लोकपर्व और धार्मिक अवसरों पर बाबा कारू खिरहर स्थान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और दर्शन का सिलसिला चलता रहता है. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना और प्रसाद अर्पित करते हैं. शाम की आरती और शंखध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.

धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन का भी केंद्र

महिषी स्थित बाबा कारू खिरहर स्थान धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ मंदिर की प्राचीन परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा कारू खिरहर के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता और सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

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लेखक के बारे में

Author: Vinay kumar mishra

Published by: Shruti Kumari

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