सहरसा से नीरज कुमार वर्मा की रिपोर्ट: विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के गरिमामयी अवसर पर पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल अंतर्गत सहरसा जंक्शन एवं विभिन्न रेलवे कॉलोनी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त परिसर अभियान को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस सघन अभियान के माध्यम से जंक्शन पर आने-जाने वाले यात्रियों, रेलकर्मियों एवं स्थानीय रेल कॉलोनी के निवासियों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति उनके कर्तव्यों को लेकर जागरूक किया गया.
सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों से कराया अवगत
जागरूकता अभियान के दौरान मुख्य रूप से एकल उपयोग वाले प्लास्टिक (सिंगल यूज प्लास्टिक) से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले जानलेवा दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी गई. रेलवे की स्वास्थ्य व स्वच्छता टीम ने स्टेशन परिसर में घूम-घूमकर लोगों से प्लास्टिक कप, पॉलिथीन और थर्माकोल के उपयोग से पूरी तरह बचने की भावुक अपील की. इसके विकल्प के रूप में:
- लोगों को कपड़े एवं जूट के पर्यावरण-अनुकूल कैरी बैग का इस्तेमाल करने,
- सफर के दौरान दोबारा उपयोग में आने वाली (रीयूजेबल) पानी की बोतलों को अपनाने,
- तथा अपने दैनिक जीवन में ‘इको-फ्रेंडली’ (पर्यावरण अनुकूल) आदतें ढालने के लिए प्रेरित किया गया.
सामूहिक सहभागिता से ही बचेगा पर्यावरण
इस खास मौके पर उपस्थित रेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वच्छ, सुंदर और हरित रेल परिसर के निर्माण के लिए सामूहिक जन-भागीदारी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया. स्टेशन पर यात्रियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण करना केवल किसी एक दिन का प्रतीकात्मक अभियान या रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की सतत जिम्मेदारी और दैनिक व्यवहार से ही धरातल पर सफल हो सकता है.
सीएचआई चंदन चौहान के नेतृत्व में चला अभियान
सहरसा जंक्शन पर इस पूरे सफल जागरूकता अभियान का नेतृत्व मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक (CHI) चंदन चौहान ने किया. उनके साथ रेल सुरक्षा बल और वाणिज्य विभाग के कर्मी भी मौजूद रहे. रेलवे के वरीय अधिकारियों ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के अवसर पर समस्तीपुर मंडल के सहरसा सहित विभिन्न स्टेशनों, सर्कुलेटिंग एरिया और विभागीय कॉलोनियों में स्वच्छता, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण एवं हरित ऊर्जा (ग्रीन इनिशिएटिव) से जुड़े कई जन-कल्याणकारी कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं, ताकि रेलवे को पूरी तरह इको-फ्रेंडली बनाया जा सके.
