जनजीवन अस्त-व्यस्त . जल जमाव में शहर हुआ पानी-पानी
तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. इससे लोगों को भारी परेशनी हो रही है.
सहरसा : पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है. पूरा शहर जल प्लावित हो चुका है. प्रभात खबर द्वारा भी लगातार जल जमाव से संबंधित खबरें प्रकाशित की जाती रही है.
लेकिन बुधवार की अहले सुबह हुई भारी बारिश ने पूरे शहर को फिर से अस्त व्यस्त कर दिया. इसके बाद से प्रभात खबर के पाठकों द्वारा बड़ी संख्या में जल जमाव की तस्वीर सहित अपनी समस्याएं भेजी गयी. जिसे नगर परिषद से दिखाने का आग्रह किया गया. पाठकों का कहना था कि दो दिन की बारिश में ऐसा आलम है,
अगर गया जैसी बारिश इधर भी हो जाय तो पूरा शहर डूब जायेगा और नगर परिषद सिवाय हाथ पर हाथ धरे रखने के कुछ नहीं कर पायेगी. कई पाठकों ने बताया कि बारिश ने घर से निकलना तक मुश्किल कर दिया. बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया. रास्ता ही नहीं था जाने का. आप पाठकों के आग्रह पर प्रस्तुत है आपकी समस्या व आपकी तस्वीरें .
.. नगर परिषद को आम लोगों की समस्या से कोई मतलब नहीं रह गया है. हर साल जल जमाव की समस्या बढ़ती जा रही है, परेशानी घटने के बजाय बढ़ती जा रही है. मंगलवार की रात और बुधवार की सुबह हुई बारिश ने घर सहित पूरे वार्ड का कचरा कर दिया. बच्चे तैयार हो रहे थे, लेकिन उन्हें स्कूल जाने दिया. घर से बाहर निकलते ही गंदे पानी वाले कीचड़ में जाना पड़ता, इससे बेहतर तो स्कूल न जाकर घर में रहो.
प्रताप नगर वार्ड नंबर 28 से ब्रजेश कुमार मुन्ना सहित छोटू, बंटी, पप्पू, रिंकू, गोलू व प्रीतम
…. यह नगर परिषद कहलाने लायक है ही नहीं. अरे साहब, जहां घर से निकलते क्या घर में पानी प्रवेश कर जाता हो, जमा पानी की बदबू व सड़ांध घर की हवाओं में तैरती हो. और ऐसा हाल सालों से हो. उसे कैसे नगर परिषद कहेंगे. वार्ड नंबर 22 का कुछ भाग ऐसा है, जिधर देखने की इच्छा नहीं होती, लेकिन इन जगहों पर रहना हमारी मजबूरी है. बारिश हमारे कष्ट व परेशानी को और बढ़ा देती है, पर नगर परिषद के साहब अंजान बने बैठे हैं.
बटराहा से अमित भारद्वाज, विभाष झा, संतोष गुप्ता, राजू गुप्ता, संजय साह
…. शहर की सबसे गंदी जगह अगर कोई फिलहाल है तो वह है नया बाजार. जहां किसी भी तरफ निकलने की कोशिश तो आप कर सकते हैं, लेकिन बिना जनप्रतिनिधियों को कोसे आपकी कोशिश सफल नहीं होगी. बाजार की तरफ से आइए या नरियार या फिर सराही की तरफ से, कम से कम घुटने भर पानी तो जरूर मिलेगा. मुख्य बाजार सहित कोई सड़क या गली-मोहल्ल नहीं बचा है, जहां जल जमाव न हो. लवली आनंद पथ की स्थिति सबसे बुरी है. डॉक्टरों व वीआइपी का मोहल्ला कहे जाने वाला नया बाजार सबसे पुराना बन गया है.
नया बाजार से प्रभात सिंह, मनीष कुमार झा, कुमोद सिंह, चमचम, रमण, बिनोद सिन्हा
