शहर को रोशनी से जगमग करने का दावा फेल सोडियम व एलइडी दोनों हैं खराब

सहरसा : जिला मुख्यालय की सड़कों व गलियों में लगी वैपर लाइट खराब हैं. इससे शाम होते ही इन गलियों में चलना मुश्किल हो जा रहा है. लाइट खराब होने से लोग सुरक्षा को लेकर सचेत तो रहते हैं, लेकिन इन गलियों से गुजरकर घर पहुंचना मजबूरी है. राह में लूटपाट का भय सताता है. […]

सहरसा : जिला मुख्यालय की सड़कों व गलियों में लगी वैपर लाइट खराब हैं. इससे शाम होते ही इन गलियों में चलना मुश्किल हो जा रहा है. लाइट खराब होने से लोग सुरक्षा को लेकर सचेत तो रहते हैं, लेकिन इन गलियों से गुजरकर घर पहुंचना मजबूरी है. राह में लूटपाट का भय सताता है.

घर पहुंच जाने के बाद ही उन्हें शांति मिलती है. पिछले कई महीनों से वैपर लाइटें या तो खराब हैं या काम करना बंद कर दिया है. इसकी मरम्मत को लेकर किसी जनप्रतिनिधि ने भी जहमत नहीं उठाई. खराब वैपर को ठीक करने के बजाय नया एलइडी लाइट भी करोड़ों रुपये खर्च कर लगायी गयी. जो सफेद हाथी साबित हो रही है. संबंधित संवेदक का दावा है कि सैकड़ों लाइट को ठीक किया गया है. लेकिन रात में कायम अंधेरा छंटने का नाम नहीं ले रहा है. इनमें अधिकांश वैपर ऊंचे-ऊंचे खंभे पर हैं. जबकि एलइडी लाइट लगने से पूर्व नगर परिषद शहर को दूधिया रौशनी में जगमगाने का दावा कर रही थी.

शहर में 80 फीसदी लाइट खराब
शहर की सड़क व गली-मुहल्ले में फिलहाल सैकड़ों सोडियम वैपर व एलइडी लाइट लगे हैं. अभी तक आंकड़े के मुताबिक इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक वैपर लाइट खराब है. नगर परिषद स्टैंडिंग व बोर्ड में इसको लेकर पार्षदों ने नाराजगी जाहिर की थी. इसके बाद कार्यपालक पदाधिकारी ने स्पेशल टीम गठित कर इसकी मरम्मत कार्य शुरू कराया था. हालांकि, शहर में अंधेरे का फायदा उठाकर जिस तरह से आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं, इससे नहीं लगता है कि नप ने आवश्यकता के मुताबिक खराब वैपर की मरम्मत करायी है.
लोगों में है आक्रोश
स्थानीय बटराहा निवासी संतोष, अजित, शुभम बताते है कि वैपर लगाने के नाम पर नगर परिषद भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है. जबकि अन्य शहरों में उसी कीमत पर लगी लाइट की गुणवत्ता अच्छी है. लोग कहते है कि लाइट खरीद में कमीशन का खेल हुआ है. जिसे उजागर करने की आवश्यकता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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