अस्पताल या निजी क्लिनिक के आसपास मेडिकल कचरा लोगों की सेहत को बिगाड़ रहा है. सरकारी अस्पताल हो या निजी, इसे नष्ट करने की व्यवस्था किसी के पास नहीं है.
सहरसा : नगर परिषद के पास न तो कोई डंपिंग यार्ड है और न ही इसके निष्पादन की कोई व्यवस्था. विशेषज्ञों की मानें तो अस्पताल या निजी क्लिनिकों से निकलने वाले कचरे को पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से निस्तारित किया जाना चाहिए. अस्पताल हो या निजी क्लिनिक सभी जगह डीप वरियल सिस्टम से मेडिकल कचरा को नष्ट किया जाता है. लेकिन अभी तक यह सुविधा जिले में न तो सरकारी अस्पताल के पास है और ना ही निजी क्लिनिक के पास. इसके चलते ऐसा कचरा भी यत्र तत्र फेंका जाता है. इसी तरह दवा दुकान व स्टॉकिस्टों के अपने एक्सपाइर दवाओं के प्रबंधन के लिए सही व्यवस्था नहीं है.
नप करे व्यवस्था: दवा व्यवसायी विनय कुमार खां ने बताया कि मेडिकल कचरा शहर के लिए सबसे गंभीर समस्या है. नगर परिषद एक जगह निर्धारित करें, तो सभी दुकानदार वहीं जाकर मेडिकल वेस्ट फेकेंगे. इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर नगर परिषद कारवाई करे.
जागरूकता की है जरूरत: थाना चौक निवासी शिव रंजन कुमार ने बताया कि मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था जिले में बहुत ही जरूरी है. लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी जागरूकता की है. अधिकांश क्लिनिक व दवा दुकानदार मेडिकल वेस्ट को यूं ही सड़कों पर फेंक देते हैं. इसके कारण लोग संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. नगर परिषद को इस मसले पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.
