कर्मी पर काम का बोझ, पिस रही जनता
एक पंचायत सचिव व हलका कर्मचारी पर तीन से चार पंचायत व हलका की है जिम्मेदारी
पतरघट : बिहार सरकार सूबे में विकास के जितने दावे करे, लेकिन प्रखंड व अंचल स्तर पर विकास कार्यों को धरातल पर उतारने वाले सरकारी कर्मियों की कमी से विकास कार्यों को संपादित करना प्रखंड व अंचल में निरर्थक साबित हो रहा है. विभागीय जानकारी के अनुसार, 11 पंचायत व पांच हल्का वाले पतरघट प्रखंड में कर्मियों की कमी से सरकारी कार्यों एवं जनहित के मामलों को निपटाने में पदाधिकारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कुछ ही दिन में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू होने वाली है. स्थिति यह है कि एक-एक पंचायत सचिव व हल्का कर्मचारी पर तीन से चार पंचायत व हल्का की जिम्मेदारी है. जिसकी वजह से विकास की बात तो छोड़िये, ग्रामीणों के छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी कई दिनों तक प्रखंड व अंचल का चक्कर लगाना पड़ता है. जबकि उसमें से भी वर्तमान में पदस्थापित सीओ सीताराम दास एवं राजस्व कर्मचारी किशोरी प्रसाद सिंह एक साथ सेवानिवृत्त होने वाले हैं.
और तो और राजस्व कर्मचारी निर्मल जायसवाल से ही अंचल निरीक्षक का भी कार्य करवाया जा रहा है. वहीं अंचल अमीन का पद सृजित होने के बावजूद स्थायी रूप से पदस्थापित नहीं करके जिला से प्रतिनियुक्ति कर कार्यों को संपादित करवाया जाता है. जिसका आमलोगों का दर्शन सप्ताह में दो से तीन दिन ही हो पाता है. जबकि रोजाना अंचल कार्यालय में जमीन विवाद से जुड़े मामले को लेकर करीब दर्जन भर से ज्यादा फरियादी आते हैं. जिसका स्थायी निदान नहीं होने से भूमि विवाद मामले को लेकर दो पक्षों में आपसी मारपीट, खून-खराबा होने के कारण ओपी में मामला दर्ज हो रहा है.
यहां भी निदान करने के बजाय 107 की कार्रवाई एवं फौजदारी मामला दर्ज कर कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं. यही हाल पंचायत सचिवों का भी है. स्वीकृत 11 में से वर्तमान में छह पंस दोहरे प्रभार में कार्यों का निबटारा कर रहे हैं. पंचायत सुपरवाइजर का पद भी प्रभार के सहारे चल रहा है. जिसके प्रभारी सांख्यिकी पर्यवेक्षक राकेश रंजन हैं. स्थिति यह है कि लाखों की लागत से बनाये गये पंचायत भवन का ताला भी 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही खुल पाता है. ऐसी स्थिति में विकास के दावे की बात करना ही व्यर्थ जान पड़ता है.
