सहरसा : फारबिसगंज रेलखंड में बीते 20 जनवरी, 2012 को रेलवे विभाग ने प्रतापगंज रेलवे स्टेशन तक मेगा ब्लॉक लिया, ताकि अमान परिवर्तन कार्य को ससमय पूर्ण कराया जा सके. साथ ही यात्रियों के सुविधा के मद्देनजर राघोपुर से सहरसा तक रेल परिचालन को जारी रखा गया. लेकिन उक्त कार्य के पूर्ण होने से पूर्व ही तीन साल बाद 2015 में राघोपुर – थरबिटिया के बीच मेगा ब्लॉक ले लिया गया. इस कारण कई प्रखंड वासियों को आवागमन में परेशानी हो रही है.
हालांकि उक्त रेल मार्ग के बीच कराये जा रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर लोगों ने सवाल भी उठाया है. लोगों का कहना है कि प्लेटफार्म निर्माण कार्य में संवेदक द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है. स्थानीय पारस छाजेर, बिजय भगत आदि ने बताया कि निर्माण कार्य में लोकल बालू का उपयोग किया जा रहा है. मामले के बाबत बागमती कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधि विजय कोणार ने कहा कि निर्माण कार्य में उपयोग हो रहे लोकल बालू की जानकारी उन्हें नहीं है. आइडब्लू अखिलेश प्रसाद ने कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जायेगा.
सपना बना है रेल परिचालन
मालूम हो कि वर्ष 1934 में आए प्रलय कारी भूकंप व बाढ़ के कारण निर्मली व फारबिसगंज के बीच परिचालित रेल सेवा ध्वस्त हो गयी थी. बाद के दिनों में कोसी नदी पर तटबंध बनने के बाद निर्मली व भपटियाही स्थित रहरिया आदि स्टेशन का अस्तित्व समाप्त हो गया. स्व ललित नारायण मिश्र जब 1973 में रेल मंत्री बने तब उन्होने इस रेलखंड की सुधि ली.
उनका सपना था कि कोसी व मिथिलांचल को जोड़ा जाय, लेकिन अब तक यह कार्य महज सपना ही बना हुआ है. हालांकि अपने कार्यकाल में उन्होंने इस दिशा में कार्य प्रारम्भ भी करवाये. 9 सितम्बर 1973 को उन्होंने प्रतापगंज, सरायगढ,फारबिसगंज रेलखंड के पुनर्स्थापन कार्य का शुभारंभ किया. जो बाद के समय में फारबिसगंज को सहरसा से जोड़ा गया.
