बिजली उपभोक्ताओं को फिर करनी होगी अपनी जेब ढीली

सहरसा सदर : बिहार के बदलते परिवेश में बिजली उत्पादन को लेकर जहां राज्य आत्मनिर्भर हुआ है, वहीं शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 22 से 23 व ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 15 से 18 घंटे बिजली आूपर्ति की सुविधा मिल रही है. विद्युत के क्षेत्र में हुए सुधार के कारण राजस्व उगाही के मामले […]

सहरसा सदर : बिहार के बदलते परिवेश में बिजली उत्पादन को लेकर जहां राज्य आत्मनिर्भर हुआ है, वहीं शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 22 से 23 व ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 15 से 18 घंटे बिजली आूपर्ति की सुविधा मिल रही है. विद्युत के क्षेत्र में हुए सुधार के कारण राजस्व उगाही के मामले में भी विभाग की स्थिति काफी सुदृढ़ मानी जा रही है.

सोमवार को बिहार विद्युत विनियामक आयोग नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रिीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा समाहरणालय स्थित सभागार में जनसुनवाई की गयी. आयोग के सदस्य एससी झा व राजीव अमित द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं से संबंधित कई शिकायतों को सुना गया. वहीं अगले वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान प्रस्तावित खुदरा टेरिफ विद्युत की नयी दरें को लेकर उपभोक्ताओं से सुझाव भी लिया गया. अगले वित्तीय वर्ष से उपभोक्ताओं को सुविधा पूर्वक बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में वर्तमान यूनिट पर 35 पैसे पर यूनिट की बढ़ोतरी का विचार लिया गया.

मालूम हो कि घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को अगले वित्तीय वर्ष से एक से सौ यूनिट तक उपभोग करने पर तीन सौ की जगह 335 रुपये वहन करना होगा. इसी तरह निर्धारित यूनिट खपत पर प्रति यूनिट 35 पैसे अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा. इस तरह घरेलू उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बोझ बिजली खपत के लिए उठाना तय है. आयोग द्वारा सिंचाई क्षेत्र में बिजली खपत टेरिफ में कोई भी बढ़ोतरी नहीं कर किसानों को राहत दी गयी है. वहीं मंदिर-मठ आदि में भी बिजली उपयोग करने वाले संस्थाओं को संस्थान पर बिजली टेरिफ में बढ़ोतरी की घोषणा की गयी. जबकि रेलवे को दी जाने वाली बिजली यूनिट में भी किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की गयी है. आयोग द्वारा प्रस्तावित नये बिजली दर का विरोध करते विद्युत उपभोक्ता संघ के सचिव हीरा प्रभाकर ने इसे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बताते इसका विरोध किया.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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