फुट ओवरब्रिज बन कर तैयार, आज रेलखंड के दौरे पर डीआरएम
राज्यरानी से 28 लोगों के कटने के बाद सुर्खियों में आया था धमारा घाट स्टेशन
सिमरी नगर : आगामी पांच फरवरी को पूर्व मध्य रेलवे के जीएम ए के मित्तल के समस्तीपुर रेल मंडल के प्रस्तावित दौरे को लेकर धमारा घाट स्टेशन पर काम की रफ्तार बढ़ गयी है. पिछले कई महीनों से कछुआ चाल से हो रहे कार्य से असंतुष्ट डीआरएम सुधांशु शर्मा द्वारा बीते कई दौरे के दौरान लगाये गये फटकार के बाद कार्य मे तेजी आयी है.
जीएम के दौरे को ध्यान में रखते हुए प्लेटफार्म उंचीकरण सहित सभी कार्यो को तेज किया गया है. वहीं सबसे ज्यादा ध्यान फुट ओवरब्रिज पर लगाया गया है.
जीएम कर सकते हैं ओवरब्रिज का उद्घाटन
जानकारी के अनुसार, ओवरब्रिज का काम लगभग पुरा हो चुका है. ओवरब्रिज की सीढ़ी भी बन कर तैयार हो गयी है. उम्मीद जतायी जा रही है कि जीएम अपने आगमन के दौरान ओवरब्रिज का उद्घाटन कर सकते हैं. वहीं जीएम आगमन को लेकर हो रही तैयारी का निरीक्षण करने आगामी 28 जनवरी को समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम सुधांशु शर्मा आ रहे हैं.
ज्ञात हो कि पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत सहरसा-मानसी रेलखंड पर अवस्थित धमारा घाट रेलवे स्टेशन उन स्टेशन में से एक है, जहां देश की आजादी के इतने वर्षो बाद भी विकास की रौशनी नहीं पहुंच पायी है. पिछले साल इस स्टेशन के विकास की दिशा में कई कार्यो की शुरूआत की गयी, लेकिन उन कार्यो की रफ्तार इतनी सुस्त रही कि काम अब तक पूरा नहीं हो पाया.
इस स्टेशन पर यात्री सुविधा के विस्तार के लिए प्लेटफार्म ऊंचीकरण, प्लेटफार्म नंबर 1 का 232 मीटर और प्लेटफार्म नंबर 2 का 415 मीटर विस्तारीकरण, प्लेटफार्म पर दोनों साइड से लोहे की जाफरी सहित सबसे महत्वपूर्ण फूट ओवरब्रिज निर्माण कार्य जारी है. इसके साथ-साथ बदला घाट से लेकर कोपड़िया तक के सड़क निर्माण कार्य की स्थिति भी काफी मध्यम गति से जारी है.
जो विकास की धीमी रफ्तार को चिन्हित करती है. मालूम हो कि धमाराघाट स्टेशन विश्व पटल पर सुर्खियों में तब आया जब 19 अगस्त 2013 की सुबह सहरसा-पटना राज्यरानी एक्सप्रेस से कटकर 28 लोगों की मौत हो गयी थी. घटना के बाद सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताअों ने धमारा घाट स्टेशन के जीर्णोद्धार के लिए खूब हो-हल्ला मचाया.
घटना के बाद बिहार सरकार और तत्कालीन रेल राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी ने धमारा के कायाकल्प की कई घोषणाएं की. लेकिन घटना के दो साल बाद भी उन बातों और वादों को अमल में लाये जाने में काफी देर लगने की उम्मीद हैं. वही ग्रामीण बताते हैं कि 2013 की घटना के बाद अब विकास के नाम पर एक ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाया गया है, जो एक मात्र सुविधा है.
