जलजमाव क्षेत्र को घेरा बंद हुआ नाले का बहाव
सहरसा मुख्यालय : नगर परिषद की लापरवाही और अकर्मण्यता से शहर लगातार बदसूरत होता जा रहा है. खास कर जलनिकासी के लिए बने नालों की सफाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देने से सारे मुहल्ले नरक में तब्दील होते जा रहे हैं. अभी कुछ दिनों पूर्व ही चाणक्यपुरी में नाला का पानी घरों में घुसने से […]
सहरसा मुख्यालय : नगर परिषद की लापरवाही और अकर्मण्यता से शहर लगातार बदसूरत होता जा रहा है. खास कर जलनिकासी के लिए बने नालों की सफाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देने से सारे मुहल्ले नरक में तब्दील होते जा रहे हैं. अभी कुछ दिनों पूर्व ही चाणक्यपुरी में नाला का पानी घरों में घुसने से मचा हाहाकार थमा भी नहीं था कि मंगलवार को वार्ड नंबर 22 में पूरी सड़क पर नाले का पानी फैल गया.
लोग त्राहिमाम हो गए, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी, कर्मचारी या उस वार्ड के पार्षद की संवेदना तक नहीं जगी. चाणक्यपुरी के सभी जलजमाव क्षेत्र रैयत की जमीन में थे. लिहाजा उनके द्वारा मिट्टी भराने की बात समझ में आती है. लेकिन वार्ड नंबर 20 के जलजमाव क्षेत्र पूरी तरह नगर परिषद के अधीन है. इसका अवैध रूप से लगातार अतिक्रमण होता जा रहा है, उस पर नप का कोई एक्शन नहीं लिया जाना समझ से परे है.
कैसे बढ़ेगा पानी, आगे नहीं है रास्ता
वार्ड नंबर 20, 22, 23, 25 एवं 27 का पानी विभिन्न नालों से जुड़कर वार्ड नंबर 20 स्थित नगर परिषद के इसी खाली स्थान में गिरता है. लेकिन बीते पांच वर्षों से लगातार इस जलजमाव क्षेत्र की जमीन का अवैध रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है. बिहार सरकार की जमीन पर बने शिव मंदिर के ठीक पीछे नाले का बहाव आकर संकड़ी हो गई है और वहां से आगे का बहाव पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है. अवैध अतिक्रमण करने वालों ने पूरब और दक्षिण की ओर से भी मिट्टी का उंचा बांध खड़ा कर दिया है.
लिहाजा पानी का दबाव वापस नालों की ओर होता है और मुहल्ले में नालों का पानी फैलता रहता है. परिषद में प्रभाव रखने वाले इन पांचों वार्ड के जनप्रतिनिधि ने भी कभी नप की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का प्रयास नहीं किया है. लिहाजा वहां एक अवैध नई बस्ती बस गई है और पांचों वार्ड के हजारों लोगों के समक्ष मानव निर्मित बड़ी समस्या खड़ी हो गयी है.