आठ साल में भी पानी नहीं दे पायी जलमीनार वर्ष 2008 में 90 लाख की लागत से हुआ था निर्माणप्रतिनिधि, सोनवर्षा राज प्रखंड मुख्यालय सहित आस पास के लोगों के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा लाखों की लागत से स्थापित जलमीनार एवं आयरण रिमूवल हैण्ड पंप से आज तक स्वच्छ जल की एक भी बूंद लोगों को नहीं मिल पायी है. इसी से संबंधित विभाग की कार्यशैली समझी जा सकती है कि लाखों खर्च के बावजूद स्वच्छ जल का सपना अधूरा ही नजर आता है. मालूम हो कि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा प्रखंड मुख्यालय सहित आसपास के लगभग 10 हजार लोगों के लिये नाबार्ड के सहयोग से लगभग 90 लाख की लागत से 40 हजार गैलेन क्षमता पानी वाला जलमीनार का निर्माण वर्ष 2008 में प्रारंभ किया गया था. लेकिन आठ वर्ष के बाद भी उक्त मीनार से जलापूर्ति शुरू नहीं हो पायी. जबकि जलमीनार के लिये बनाये गये 25 स्टैण्ड पोस्ट में आधे से ज्यादा ध्वस्त हो चुके हैं. यही नहीं क्षेत्र के पानी में लौह अयस्क की मात्रा सर्वविदित होने के बावजूद जलमीनार के साथ लौह अयस्क निस्तारण संयंत्र की व्यवस्था नहीं की गयी. इसके अतिरिक्त स्वच्छ पेयजल के लिये प्रखंड मुख्यालय में 5 फीट उंचे चबूतरे पर पीएचइडी द्वारा ही एक आयरण रिमूवल हैण्ड पंप भी वर्ष 2008 के प्रलंयकारी बाढ के बाद लगाया गया था. लेकिन स्वच्छ जल को कौन पूछे, इससे लौहयुक्त पानी की एक बूंद भी नहीं टपकती है. फोटो- मिनार 12 – सिर्फ खड़ी भर है जलमीनार
आठ साल में भी पानी नहीं दे पायी जलमीनार
आठ साल में भी पानी नहीं दे पायी जलमीनार वर्ष 2008 में 90 लाख की लागत से हुआ था निर्माणप्रतिनिधि, सोनवर्षा राज प्रखंड मुख्यालय सहित आस पास के लोगों के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा लाखों की लागत से स्थापित जलमीनार एवं आयरण रिमूवल हैण्ड पंप से आज तक स्वच्छ जल की एक भी […]
