सहरसा : एक ओर जहां सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन स्टेशन को ए श्रेणी का दर्जा दिया गया है, वहीं इसकी खूबसूरती बढ़ने के बजाय और घटती जा रही है. स्टेशन के प्लटफार्म नंबर दो की हालत तो काफी खास्ता है. प्लेटफॉर्म नंबर दो पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्डे नजर आते हैं. मानसी से सहरसा डाउन तरफ से आने वाली अधिकांश ट्रेनें प्लेटफॉर्म नंबर दो पर रूकती है. प्लेटफॉर्म पर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच प्लेटफॉर्म, यात्रियों को समझ नहीं आ रहा.
गड्ढों के बीच छिप गया 400 मीटर लंबा प्लेटफॉर्म, ईंट की भी हो रही चोरी
सहरसा : एक ओर जहां सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन स्टेशन को ए श्रेणी का दर्जा दिया गया है, वहीं इसकी खूबसूरती बढ़ने के बजाय और घटती जा रही है. स्टेशन के प्लटफार्म नंबर दो की हालत तो काफी खास्ता है. प्लेटफॉर्म नंबर दो पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्डे नजर आते हैं. मानसी से सहरसा डाउन तरफ से […]

कई बार जल्दीबाजी में यात्री गिरकर चोटिल हो चुके हैं. इतना हीं नहीं जहां-जहां दो-तीन फीट के गड्ढे हैं, वहां से ईंट तक चोरी कर लिए गये हैं. लेकिन रेल प्रशासन को यात्रियों की समस्या से कोई वास्ता नहीं रह गया है. बता दें कि 10 माह पूर्व करीब 2 करोड़ की लागत से प्लेटफॉर्म नंबर दो के निर्माण सहित प्लेटफॉर्म नंबर एक और स्टेशन का सौंदर्यीकरण किया गया था.
लेकिन प्लेटफॉर्म नंबर दो के निर्माण कार्य में पटना की एक एजेंसी ने गुणवता कायम नहीं रखी. नतीजा प्लेटफॉर्म नंबर दो जिसकी लंबाई करीब 400 मीटर है, वहां बिछाये गये फेवर बलास्ट जगह-जगह से उखड़ने लगे हैं. रात के अंधेरे में उखड़ने वाली जगह से ईंट तक असामाजिक तत्व चोरी कर ले जा रहे हैं.
ऐसा नहीं कि प्लेटफॉर्म की सुरक्षा के लिए आरपीएफ की तैनाती नहीं है, फिर भी असामाजिक तत्त्व चोरी करने से बाज नहीं आ रहे. हालांकि जब सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो का निर्माण कार्य किया जा रहा था, उसी समय एजेंसी द्वारा घटिया साम्रगी का इस्तेमाल की यात्रियों की शिकायतों पर समस्तीपुर डिवीजन में डीआरएम सहित अन्य विभागीय अधिकारियों ने इसका संज्ञान लिया था. तत्कालीन डीआरएम आरके जैन ने इसके लिए विजिलेंस जांच का आश्वासन भी दिया था.