सहरसा : बिहार सरकार के पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा हर वर्ष आयोजित होने वाले कोसी महोत्सव पर इस बार काली छाया पड़ती दिख रही है. राज्य सरकार के कैलेंडर में दो दिवसीय कोसी महोत्सव की तिथि नौ एवं दस मार्च निर्धारित है. बीते 16 जनवरी को कोसी महोत्सव के सफल आयोजन के लेकर अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में समाहरणालय सभा कक्ष में बैठक भी हुई थी.
लेकिन मात्र तीन दिन शेष रहने के बावजूद अब तक कुछ होता नहीं दिख रहा है. मंगलवार को आयोजन स्थल स्टेडियम ग्राउंड में पंडाल के लिए कुछ बांस जरूर गिराये गये. लेकिन न तो कहीं होर्डिंग-बैनर लगाये गये, न किसी माध्यम से प्रचार-प्रसार होता ही दिख रहा है.
पंकज उधास व कुमार शानू की हो चुकी है प्रस्तुति: 2002 से आयोजित होने वाले कोसी महोत्सव के मंच पर अब पंकज उधास, अनूप जालोटा, कविता कृष्णमूर्ति, शारदा सिन्हा, मो अजीज, तृप्ति शाक्या, विजया भारती, नीतू नूतन, वसुंधरा दास, बिनोद राठौर, कुमार शानू, बाली ब्रह्मभट्ट जैसे स्थापित कलाकारों की प्रस्तुति हो चुकी है.
इसी मंच पर कालबेलिया राजस्थानी, बीहू असमिया, छऊ छत्तीसगढ़ी, सूफियाना व दिल्ली का बैले नृत्य भी हो चुका है. विश्व प्रसिद्ध कत्थक कलाकार मधुकर आनंद, नृत्यांगना नलिनी-कमलिनी की भी प्रस्तुति हो चुकी है.
कोसी महोत्सव के आयोजन में यहां घुड़दौड़, कुश्ती, पैरासेलिंग, नौकायन, तीरंदाजी, बैलगाड़ी दौड़, राइफल शूटिंग, मैराथन दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकशी, बैडमिंटन का भी आयोजन हो चुका है. महोत्सव के दौरान कोसी क्षेत्र को राज्य व देश में स्थापित करने वाले दर्जनों स्टॉल लगाये जाते थे. लेकिन सरकार व प्रशासन की निष्क्रियता से धीरे-धीरे यह जिले का आयोजन भी बनकर नहीं रह पाया है.
न प्रचार-प्रसार न कलाकारों को ही एडवांस
कोसी की संस्कृति का अन्य क्षेत्रों अथवा अन्य राज्यों की संस्कृति से आदान-प्रदान करने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर आयोजित होने वाले कोसी महोत्सव का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है. तीन दिन शेष रहने के बाद शहरी क्षेत्र में कहीं इसका प्रचार-प्रसार नहीं दिख रहा है.
जबकि जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों सहित राज्य की राजधानी में होर्डिंग्स के माध्यम से प्रचार करने की बातें होती है. आश्चर्य तो यह है कि आयोजन के तीन दिन शेष रहने के बावजूद अब तक आमंत्रित कलाकारों के नाम भी उद्घाटित नहीं किये गये हैं. शहर के लोग यह भी नहीं जान पाये हैं कि महोत्सव में कहां से कौन कलाकार आ रहा है.
समाहरणालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रशासन ने जिस किसी कलाकारों को आमंत्रित किया है, उनमें से अब तक किसी को भी एडवांस तक नहीं दिया गया है. लिहाजा उनकी टिकट बुकिंग भी नहीं हो सकी है. महोत्सव के अवसर पर खेलकूद प्रतियोगिता का भी आयोजन होता रहा है.
लेकिन इस बार वह होगा भी या नहीं, यह भी साफ नहीं किया जा सका है. जानकारी के अनुसार प्रकाशित होने वाली स्मारिका के लिए अब तक मात्र तीन आलेख ही जमा हुए हैं. ऐसे में स्मारिका का प्रकाशन भी संदेह के घेरे में है.
