Rohtas News (रमेश कुमार पाण्डेय): रोहतास जिले के प्रमुख प्रखंडों में शुमार कोचस आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है. स्वर्णिम इतिहास और राजनीतिक पहचान के बावजूद यहां की सफाई व्यवस्था बदहाल बनी हुई है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जगह-जगह कूड़े-कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता और जनप्रतिनिधियों के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित रूप से कचरे का उठाव नहीं होने से दुर्गंध फैल रही है. इससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है.
लाखों खर्च के बावजूद नहीं दिख रहा असर
जानकारी के अनुसार ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन योजना के तहत पंचायतों में हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों के अनुरूप कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी है, लेकिन धरातल पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है. अधिकांश पंचायतों में सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है.
संक्रमण फैलने का बढ़ा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि कूड़े के ढेर से मच्छरों और अन्य रोगजनक जीवों की संख्या बढ़ रही है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है. गांवों के मुख्य मार्ग, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर फैले कचरे के कारण राहगीरों को भी परेशानी हो रही है.
नियमित सफाई की मांग
लोगों ने प्रशासन से नियमित सफाई अभियान चलाने और कचरा उठाव की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
क्या कहते हैं बीडीओ
इस संबंध में बीडीओ चंद्रभूषण गुप्ता ने बताया कि लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत विभिन्न पंचायतों में कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है. उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
