387 क्रशर संचालकों में जगी उम्मीद

खनन के लिए संचालकों को एनओसी मिला कैमूर पहाड़ी के गायघाट व गिंजवाही की तीन खदानों में खनन के लिए वन विभाग से प्रशासन को मिल गयी है हरी झंडी वर्ष 2012-13 में क्रशरों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी नहीं मिलने पर प्रशासन ने किया था लाइसेंस रद्द सासाराम कार्यालय : कैमूर पहाड़ी के […]

खनन के लिए संचालकों को एनओसी मिला
कैमूर पहाड़ी के गायघाट व गिंजवाही की तीन खदानों में खनन के लिए वन विभाग से प्रशासन को मिल गयी है हरी झंडी
वर्ष 2012-13 में क्रशरों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी नहीं मिलने पर प्रशासन ने किया था लाइसेंस रद्द
सासाराम कार्यालय : कैमूर पहाड़ी के गायघाट व गिंजवाही के तीन खदानों में खनन के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद एक बार फिर क्रशर संचालकों में क्रशर उद्योग के दिन बहुरने की उम्मीद जग गयी है. खनन शुरू होने के साथ क्रशर भी चालू होंगे, ऐसी उम्मीद की जा रही है. वर्तमान समय में 387 क्रशर मशीनों के संचालक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. कुछ उम्मीद छोड़ राज्य से पलायन कर गये हैं. वैसे लोगों में खनन के लिए वन विभाग से मिली हरी झंडी संजीवनी का काम की है.
387 क्रशर मशीनों के लाइसेंस हुए थे रद्द: सरकार द्वारा खनन को बंद करने की घोषणा का खनन पट्टों के लीजधारियों पर जो प्रभाव पड़ा, वह अलग था. लेकिन, सबसे ज्यादा प्रभावित क्रशर मशीनों के संचालक हुए.
उन्हें बीस वर्ष के लिए लाइसेन्स मिला था. लाखों रुपये एक-एक क्रशर के लिए जमा हुए थे. कुल 387 क्रशर मशीने गोपी बिगहा, करवंदिया, बासा, अमरा-अमरी, गायघाट, गिंजवाही आदि गांवों में चल रही थी. राज्य सरकार के आदेश के बाद पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2012-13 में उनके प्रदूषण के प्रमाण पत्र को देना बंद किया. जिसके आधार पर प्रशासन ने क्रशर मशीनों का लाइसेंस रद्द कर दिया. अब इन क्रशर संचालकों में आशा की किरण जगी है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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