न पानी की सप्लाइ, न ही स्ट्रीट लाइट

नगर पर्षद की योजनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं... उद्योग समूह की कॉलोनी व रक्षावीर इलाके को मिला कर बना है यह वार्ड डेहरी (कार्यालय) : नगर पर्षद डेहरी डालयिमानगर को नरक पर्षद की उपमा से अलंकृत करनेवालों की बातों में हम को देखना हो, तो वार्ड सात का भ्रमण करना जरूरी है़ अतिमहत्वपूर्ण […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 12, 2016 7:47 AM

नगर पर्षद की योजनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं

उद्योग समूह की कॉलोनी व रक्षावीर इलाके को मिला कर बना है यह वार्ड

डेहरी (कार्यालय) : नगर पर्षद डेहरी डालयिमानगर को नरक पर्षद की उपमा से अलंकृत करनेवालों की बातों में हम को देखना हो, तो वार्ड सात का भ्रमण करना जरूरी है़ अतिमहत्वपूर्ण श्रम न्यायालय, श्रम कल्याण कार्यालय, कंपनी के डी टाइप व फैमिली फ्लैट र्क्वाटरों के अलावा बीआरसी हाइ स्कूल डालमियानगर में राष्ट्रीय स्तर का खेल मैदान, चावल मंडी व मुख्य बाजार, प्राचीन रक्षावीर मंदिर को अपने में समेटे उक्त वार्ड में जलजमाव के चलते कई लोग अपने घरों में तालाबंद कर किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं.

डेहरी-राजपुर पथ के पश्चिमी हिस्से में स्थित उक्त वार्ड सुअरों के चारागाह के रूप में मशहूर है. उत्तर में इएसआइ की चहारदीवारी दक्षिण में ऑफिसर बंगला, पूरब में एस ब्लॉक व पश्चिम में सोन कैनाल की चौहद्दी वाले इस वार्ड में आधा हिस्सा कंपनी के र्क्वाटर का तो आधा हिस्सा में रक्षावीर मुहल्ले के लोग निवास करते हैं. करीब 12 हजार की जनसंख्या वाले उक्त वार्ड में मतदाताओं की संख्या लगभग पांच हजार है. रोहतास उद्योग समूह परिसर में नगर पर्षद द्वारा आजतक कोई योजना नहीं दिया गया. बाहरी हिस्से में कुछ गलियों में पीसीसी व नाली निर्माण का कार्य हुआ है. लेकिन, उन नालियों का पानी मुख्य नाला नहीं होने के कारण सड़क पर ही बहता है.

या फिर किसी के घर में घूसता है. वार्ड में पानी की सप्लाइ का कोई व्यवस्था नहीं है. लोग हैंडपंप पर निर्भर हैं. रक्षा मंदिर मोड़ पर बरसात की कौन कहे गरमी में भी नाली का पानी जमा हो जाता है़ मुहल्ले की ठाकुरबाड़ी गली हो या फिर मुख्य मार्केट, चावल मंडी का इलाका. जलजमाव व दुर्गंध देते गंदे पानी ने लोगों का जीवन मुहाल कर दिया है. इन स्थानों पर आदमी से ज्यादा सूअर ही मिल जाते हैं.

वार्ड के निवासी कहते हैं कि नगर पर्षद क्षेत्र में होने का हम दंश झेल रहे हैं. नप की व्यवस्था पंगु है. स्ट्रीट लाइट के नाम पर कुछ एलइडी लाइट व सोलर लाइट टीम-टिमाते नजर आते है. वे भी कब जलते व कब बुझते है. समझ में नहीं आता. एक हाइस्कूल, एक मिडिल स्कूल, एक मिनी व एक बड़ा आंगनबाड़ी, एक कस्तूरबा विद्यालय को अपने आप में समेटे इस वार्ड के निवासी शहरी क्षेत्र में रहने को अब श्राप के रूप में देखते हैं.