जिस वस्तु पर प्रतिबंध लगा, वह अब आसानी से मिल रही, कीमत भी बढ़ी

सासाराम कार्यालय : जिले में शराब पीने व उसकी बिक्री पर अप्रैल, 2016 से प्रतिबंध है. कैमूर पहाड़ी में पत्थर तोड़ने पर 10 वर्ष पूर्व से प्रतिबंध है. क्रशन मशीनों के संचालन पर वर्ष 2012 से पूर्ण प्रतिबंध है. पॉलीथिन के प्रयोग पर 25 अक्तूबर, 2019 से प्रतिबंध है, तो ओवरलोडिंग पर शायद जब से […]

सासाराम कार्यालय : जिले में शराब पीने व उसकी बिक्री पर अप्रैल, 2016 से प्रतिबंध है. कैमूर पहाड़ी में पत्थर तोड़ने पर 10 वर्ष पूर्व से प्रतिबंध है. क्रशन मशीनों के संचालन पर वर्ष 2012 से पूर्ण प्रतिबंध है. पॉलीथिन के प्रयोग पर 25 अक्तूबर, 2019 से प्रतिबंध है, तो ओवरलोडिंग पर शायद जब से परिवहन कानून है, तभी से प्रतिबंध है. गौर करें तो जिस वस्तु पर प्रतिबंध लगा, उसकी कीमत तो बढ़ी ही, उसकी उपलब्धता भी और आसान हो गयी.

इन सामान की बिक्री के लिए तस्करों के बड़े-बड़े गिरोह खड़े हो गये. पुलिस व प्रशासन इन पर रोक लगाने के दावे पर दावे करते गये और इनकी उपलब्धता और आसान होते गयी. आलम है कि करवंदिया क्षेत्र में रात में कौन कहे दिन में ही धमाके से पहाड़ी गूंज उठते हैं और सड़क पर चलनेवाली पुलिस व प्रशासन की कार्यशैली पर मुस्कुरा कर आगे बढ़ जाते हैं. पोर्टेबुल क्रशर मशीनों के संचालन से उठती धूल बयां करती है कि वहां गिट्टी की तुड़ाई हो रही है.
सोमवार की रात शहर के गौरक्षणी मुहल्ले की गली के मकान से बरामद शराब खुद बयां कर रही है कि शहर की गलियों तक शराब उपलब्ध है. पॉलीथिन पर प्रतिबंध तो कागजों तक सिमटा है, तभी तो नगर पर्षद व कलेक्ट्रेट के सामने के दुकानदार खुलेआम इसका उपयोग कर रहे हैं. तात्पर्य यह कि जिस वस्तु पर प्रतिबंध लगा, उसकी बिक्री और बढ़ गयी और इसके साथ ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी व्यस्तता दिखाने का अवसर मिल गया.
पॉलीथिन के इस्तेमाल से नहीं हो रहा परहेज
25 अक्तूबर, 2019 को पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया. कुछ दिनों तक लगा मानो बाजार से अब पॉलीथिन की विदाई हो ही जायेगी. सामाजिक संगठनों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक इसके विरोध में सड़क से लेकर बाजार तक उतर पड़े. लेकिन, इसके 27 दिन बाद भी स्थिति वहीं है, बल्कि यह कहे कि पहले से ज्यादा पॉलीथिन कैरी बैग का इस्तेमाल होने लगा है.
हां, इतना जरूर है कि थोक विक्रेता अब दुकानों में पॉलीथिन कैरी बैग नहीं रख कर उसे हॉकरों के माध्यम से बाजार में भेज रहे हैं. इसके साथ ही उधार की बिक्री बंद हो गयी है. अब नकद में ही दुकानदारों को पॉली बैग मिल रहा है.
ग्राहक भी ऐसे की दुकानदारों पर पॉली बैग के लिए दबाव बना रहे हैं, मानो उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं, तो फिर अफसरों को क्या पड़ी है कि वे इसके पीछे भागे. नप की कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी कहती हैं कि इसके लिए समय-समय पर छापेमारी की जाती है. लोगों में जागरूकता की कमी के कारण पॉली बैग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है.
धमाकों से गूंज उठती है पहाड़ी, धूल से परेशान
वर्ष 2009 में तत्कालीन जिलाधिकारी अनुपम कुमार के समय में क्रशन मशीनों पर आफत आयी. उसके प्रतिबंध की बातें होने लगीं. क्रशर संचालक धरना-प्रदर्शन के साथ न्यायालय तक की शरण में गये. लेकिन, उन्हें कोई राहत नहीं मिली. इसके बाद के वर्षों में पहाड़ी के खनन क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया गया.
अवैध खनन को रोकने के लिए प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर खनन क्षेत्र के रास्तों को कटवा दिया. यह एक बार नहीं, कई बार हुआ. एसडीओ, खनन पदाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, वन विभाग सभी को इसके विरुद्ध कार्रवाई को तैयार किया गया, पर हुआ क्या? मंगलवार की रात करीब आठ बजे ही करवंदिया क्षेत्र में धमाकों से गुलजार होता रहा.
धूल के गुब्बार उड़ते रहे, जो इतना बताने के लिए काफी थे कि आज भी वहां पत्थरों की तुड़ाई व करवंदिया खनन क्षेत्र से गिट्टी की सप्लाई बदस्तूर जारी है. हां थोड़ा कम है, पर उसे पूर्ण विराम नहीं कहा जा सकता. अब भी तस्कर सक्रिय हैं और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी सजग.
मुहल्लों में भी आसानी से ग्राहकों को उपलब्ध हो रही शराब
सोमवार की रात शहर के गौरक्षणी मुहल्ले में शराब की खेप पकड़ी गयी. इससे पहले डीएसपी के निवास के सामने एक घर से बड़ी संख्या में शराब की बोतलें जब्त की गयी थीं. शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जब जिले में किसी न किसी गांव, खेत, घर, सड़क से शराब की बरामदगी नहीं होती हो.
यह क्या दर्शाता है? शराब पर प्रतिबंध का असर नहीं है या फिर प्रतिबंध को लागू करनेवाले सुस्त हैं, तभी तो गांव व शहर की गलियों तक दूसरे राज्यों से शराब की पहुंच आसान होते जा रही है. थानेदारों की मानें तो वे दबी जुबान से इसे स्वीकारते हुए कहते हैं कि कहां-कहां नजर रखे. संसाधन कम और तस्कर ज्यादा हो गये हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >