सासाराम शहर : हर बड़े त्योहार में दो से तीन दिनों तक शहर से लेकर ग्रामीण फीडरों की बिजली काट दी जाती है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मुहर्रम पर ताजिया जुलूस को लेकर तीन दिनों में करीब 41 घंटे बिजली काटने का विभाग ने फरमान जारी किया था. इसकी सूचना उपभोक्ताओं को पहले ही उपलब्ध करायी जा चुकी थी. पहले दिन अधिकतर लोगों का इससे ध्यान हट गया और समय के अनुसार शहर की बिजली काट दी गयी, जिससे शहर के लोगों को काफी परेशानी हुई.
72 में 41 घंटे कटी बिजली, गर्मी से बेहाल लोग पानी को तरसे
सासाराम शहर : हर बड़े त्योहार में दो से तीन दिनों तक शहर से लेकर ग्रामीण फीडरों की बिजली काट दी जाती है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मुहर्रम पर ताजिया जुलूस को लेकर तीन दिनों में करीब 41 घंटे बिजली काटने का विभाग ने फरमान जारी किया था. इसकी […]

मुहर्रम के बाद अब दशहरा, दिवाली, छठ जैसे कई बड़े त्योहार हैं, जिसमें मूर्ति विसर्जन के लिए जुलूस निकालने का प्रावधान है. अब इन पर्वों के दौरान भी शहर व ग्रामीण इलाकों में कवर तार लगाने का काम पूरा नहीं हुआ, तो बिजली काटने की जरूरत पड़ेगी.
तकिया मुहल्ला के संजय गुप्ता, धनपुरवा के संतोष पासवान, बॉलीया रोड के जितेन्द्र कुशवाहा, भारतीगंज मुहल्ले के दीपक चौरसिया आदि ने बताया कि तीन दिनों तक त्योहार के जुलूस को लेकर शहर में 15 से 17 घंटे तक बिजली कटी रही, जिससे छात्र-छात्राएं, घरेलू महिलाएं, दुकानदार, किसानों से लेकर आमजनों का भी जन जीवन प्रभावित रहा. लोगों ने कहा कि विगत पांच वर्षों से शहर में कवर तार लगाने का काम चल रहा है.
हर त्योहार के बाद विभाग बैठक कर बिजली दुरुस्त करने का दावा करता है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब पांच वर्षों में शहरी इलाकों में कवर तार नहीं बदले जा सके, तो पूरे जिले में कवर तार बदलने में विभाग को और कितने समय लगेगा. कवर तार लगाने के कार्य में विलंब किसकी लापरवाही है?
पांच वर्षों में भी नहीं पूरा हुआ कवर्ड तार लगाने का कार्य : करीब पांच वर्षों से शहर के जर्जर तारों को बदल कर कवर्ड तार लगाने का काम चल रहा है. फिर भी अबतक शहर के जर्जर तारों को बदलने में बिजली विभाग असफल साबित हुआ है.
पर्व से कई माह पूर्व से ही वरीय अधिकारियों द्वारा बैठक कर कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों को कवर्ड तार बदल कर शहर की बिजली दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया था, इसके बावजूद भी वरीय अधिकारियों का आदेश काम नहीं आया और त्योहार पर घंटों बिजली काटनी पड़ी.
तीन दिन तक ऐसे रही बिजली बंद
नौ सितंबर सुबह 11 से शाम सात बजे तक फीडर दाे व तीन
10 सितंबर सुबह चार से रात आठ बजे तक फीडर एक, दो, तीन व तकिया
11 सितंबर सुबह छह से रात 11 बजे तक फीडर एक, दो, तीन, तकिया व मिनी
लोगों को हुई ये परेशानी
तीन दिन तक ऐसे रही बिजली बंद
नौ सितंबर सुबह 11 से शाम सात बजे तक फीडर दाे व तीन
10 सितंबर सुबह चार से रात आठ बजे तक फीडर एक, दो, तीन व तकिया
11 सितंबर सुबह छह से रात 11 बजे तक फीडर एक, दो, तीन, तकिया व मिनी
लोगों को हुई ये परेशानी
पेयजल के लिए लोगों को झेलनी पड़ी काफी परेशानी
बच्चों की पढ़ाई हुई बाधित
विद्युत उपकरण बंद
ऊमस भरी गर्मी से लाेग रहे हलकान
दुकानों के संचालन में परेशानी
अधिकांश परेशानी छोटे-छोटे बच्चों को उठानी पड़ी
बिजली कटौती में पेयजल की गंभीर समस्या
शहर में जैसे ही लंबे समय तक बिजली की कटौती होती है, पेयजल सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आता है. तीन दिनों तक लोगों को पानी के लिए काफी देर तक बिजली आने का इंतजार करना पड़ा. शहर के गुरुद्वारा रोड, गंधी के नीम, गोला रोड समेत कई मुहल्लों के उपभोक्ताओं ने कहा कि अगर प्रशासन व बिजली विभाग त्योहारों पर बिजली काटने का फरमान जारी करता है, तो पहले पेयजल संकट झेलने वाले मुहल्लों में टैंकर की व्यवस्था करनी चाहिए. ऐसा नहीं करना प्रशासनिक चूक है.
क्या कहते हैं अिधकारी
कवर तार बदलने का समय 2020 तक है. अभी तक शहर में कवर तार लगाने का 85 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है. त्योहारों में जुलूस निकाला जाता है, ऐसे में कवर तार रहने के बावजूद भी दुर्घटना से बचने के लिए बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है.
अक्सर देखा जाता है कि जुलूस के दौरान कवर तार भी टूट जाता है. ऐसे में बिजली आपूर्ति बंद करना अनिवार्य हो जाता है. हालांकि आपूर्ति बंद होने से लोगों को थोड़ी परेशानी होती है, लेकिन कुछ देर के लिए परेशानी के कारण किसी की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है.
विश्वजीत कुमार सिन्हा, एसडीओ विद्युत प्रमंडल सासाराम
बिजली कटौती से किसान रहे परेशान
मुहर्रम को लेकर तीन दिनों तक बिजली कटौती के कारण शहरी व ग्रामीण इलाकों के किसानों को भी काफी परेशानी हुई. शहर के पूर्वी व दक्षिण छोर पर शहर के किसान बड़े पैमाने पर सब्जियां उगाते हैं, जिन्हें एक-दो दिन पर बोरिंग चला कर पटवन करना होता है.
जिले में बारिश कम होने से ग्रामीण क्षेत्रों के धान के खेतों में दरार पड़ने लगी है. इससे ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को लगातार बोरिंग चलाने की जरूरत पड़ रही है. त्योहारों पर बिजली कटी रहने के कारण किसानों को भी काफी परेशानी हुई.