सासाराम : सुनी पड़ी कचहरियां अब गुलजार हो जायेंगी. ग्राम के लोगों को उनकी समस्याओं का समाधान उच्च न्यायालय से पूर्व ग्राम कचहरी में ही हो जायेगा. ऐसा इस लिए कि सरकार ग्राम कचहरी के सदस्यों को ग्राम कचहरी से जुड़ी अहम जानकारियां प्रशिक्षण के माध्यम से दिलवा रही हैं.
अब प्रशिक्षित सरपंच अपना फैसला न्याय मित्र व अन्य सदस्यों से सलाह कर दे सकेंगे. इसको ले जिले के प्रखंडों में स्थित ग्राम कचहरी के सरपंचों, उप सरपंचों, न्यायमित्रों व सचिवों का दो दिवसीय प्रशिक्षण तिथिवार समाहरणालय परिसर स्थित जनता दरबार हॉल में चल रहा है.
10 जुलाई से शुरू सासाराम प्रखंड क्षेत्र के ग्राम कचहरी के सदस्यों का प्रशिक्षण गुरुवार को संपन्न हो गया. प्रशिक्षण के समापन के दिन सेवानिवृत्त न्यायाधीश आरडी पाल, कन्हैया राम ने ग्राम कचहरी के सदस्यों को ग्राम कचहरी की अधिकारिता, ग्राम कचहरी के क्रिमनल क्षेत्राधिकार, ग्राम कचहरी की दांडिक अधिकार सहित अन्य बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया. श्री पाल ने प्रशिक्षण देते हुए बताया कि ग्राम कचहरी के क्रिमनल क्षेत्राधिकार व ग्राम कचहरी की दांडिक अधिकार हैं.
बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा 106 के अनुसार ग्राम कचहरी की न्यायपीठ ग्राम कचहरी की स्थानीय सीमाओं के भीतर किये गये अपराध या अपराध के दुष्प्रेरण या प्रयास के विचारण की अधिकारिता है, जो कि-(क) भारतीय दंड संहिता (45, 1860) की धारा- 140, 142, 143, 145, 147, 151, 153, 160, 172, 174, 178, 179, 269, 277, 283, 285, 286, 289, 290, 294, 294 (ए), 332, 334, 336, 341, 352, 356, 357, 374, 403, 426, 428, 430, 447, 448, 502, 5041, 506, व 510, के अंतर्गत अपराध किये गये हों.
उन्होंने ग्राम कचहरी न्यायपीठ के दांडिक शक्तियां (धारा-107) के संबंध में बताते हुए कहा कि ग्राम कचहरी की न्यायपीठ पक्षों को सुनने के बाद व न्यायपीठ के समक्ष पेश किये गये साक्षों पर विचार करने के बाद अपना निर्णय अभिलिखित करेगी, दोष सिद्ध होने पर वह अपराधी को ऐसा जुर्माना से दंडित करेगी जिसकी राशि एक हजार से ज्यादा का न हो. परंतु, अगर मामले के विचारण के समक्ष पीठ यानी न्यायपीठ में उपस्थिति सदस्य समुदाय एक मत नहीं हो, तो वैसे सदस्यों का बहुतम का निर्णय ग्राम कचहरी न्यायपीठ का निर्णय होगा.
परंतु आगे यह कि मामले के विचारण में न्यायपीठ में उपस्थिति सदस्यों के मतों की गणना बराबरी का हो जाये, तो उस परिस्थिति में सरपंच अपना निर्णायक मत देगा तथा पीठ का उक्त निर्णय सरपंच के द्वितीय अथवा निर्णायक मत के अनुसार होगा. ग्राम कचहरी की कोई पीठ, साधारण या सश्रम कारावास नहीं दे सकेगी, चाहे वह मूल दंडादेश में हो या जुर्माना का भुगतान करने में व्यक्तिक्रम करने पर हो.
जब कोई न्यायपीठ धारा (1) के अधीन कोई जुर्माना अधिरोपित करती है, वह आदेश पारित करते समय निर्देश दे सकती हैं कि वसूले गये जुर्माना का संपूर्ण अथवा अंश उस अपराध के कारण हुई हानि अथवा क्षति के प्रतिकार के भुगतान के लिए उपयोजित किया जायेगा.
जब किसी व्यक्ति को ग्राम कचहरी की किसी न्यायपीठ द्वारा सजा दी जाये, तब वह न्यायपीठ इस तरह दंडादिस्ट व्यक्ति द्वारा लिखित या मौखिक रूप से अनुरोध किये जाने पर इस अधिनियम के अधीन अपील दायर करने की विहित अवधि के लिए ऐसी सजा के प्रवत्तान को स्थगित कर सकेगी. ग्राम कचहरी या उसकी न्यायपीठ द्वारा पारित आदेश की प्रति आदेश पारित किये जाने की तारीख से एक सप्ताह के भीतर, इस प्रयोजनार्थ विहित शीति से पक्षकारों को मुफ्त उपलब्ध करायी जायेगी.
शांति भंग होने की संभावना पर विधि संगत उपाय
वहीं सेवानिवृत्त न्यायाधीश कन्हैया राम ने सरपंच की दांडिक शक्तियां (धारा-109) को बताते हुए कहा कि जब किसी सरपंच को ऐसा विश्वास हो जाये कि लोक प्रशांति में बाधा आने वाली है या शांति भंग होने की संभावना है तो वह तुरंत रोकथाम के लिए विधि संगत उपाय करेगा और उक्त तथ्यों का जिक्र करते हुए विहित रीति से तामिल कर, किसी व्यक्ति को ऐसा कार्य न करने तथा उसके कब्जा वाला संपत्ति के संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश देगा.
साथ ही उन्होंने ग्राम कचहरी के सिविल क्षेत्राधिकार, ग्राम कचहरी के दीवानी मामलों का दायर किया जाना व ट्रायल, ग्राम कचहरी के अपीलय क्षेत्राधिकार व अन्य की जानकारी भी दी. वहीं, शुक्रवार को शिवसागर प्रखंड ग्र्राम कचहरी के सरपंचों, उप सरपंचों, न्यायमित्रों व सचिवों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू होगा, जो 13 जुलाई तक चलेगा. मौके पर जिला पंचायती राज पदाधिकारी किशोर कुमार, धौधाड़ सरपंच ददन सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे.
