रोटा वायरस के कारण होती हैं 40 प्रतिशत मौतें, इलाज संभव

सासाराम : बच्चों और नवजातों में गंभीर दस्त होने का सबसे सामान्य कारण है रोटा वायरस. विभिन्न संस्थाओं के आकलनों के मुताबिक रोटा वायरस बीमारी के कारण लगभग 40 प्रतिशत मौतें होती हैं. लेकिन, अब इन मौतों को कम किया जा सकता है. इसके लिए सरकार ने देश के लगभग 11 राज्यों में पूर्व से […]

सासाराम : बच्चों और नवजातों में गंभीर दस्त होने का सबसे सामान्य कारण है रोटा वायरस. विभिन्न संस्थाओं के आकलनों के मुताबिक रोटा वायरस बीमारी के कारण लगभग 40 प्रतिशत मौतें होती हैं. लेकिन, अब इन मौतों को कम किया जा सकता है. इसके लिए सरकार ने देश के लगभग 11 राज्यों में पूर्व से ही रोटा वायरस वैक्सीन को चला रखा है. 12वें राज्य के रूप में बिहार में भी रोटा वायरस वैक्सीन को तीन जुलाई से शुरू किया जा रहा है.

उक्त बातें जिला प्रतिरक्षण अधिकारी और परिवार नियोजन के नोडल डॉ आरकेपी साहू ने सिविल सर्जन कार्यालय कक्ष में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि रोटा वायरस एक दोहरे-स्ट्रैंड वाला आरएनए वायरस है, जो रियोवायरस परिवार का है. इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखे जाने पर, वायरस की आकृति एक पहिये की तरह दिखाई देती है. इसलिए इसका नाम रोटा रखा गया है, जो पहिया के लिए लैटिन शब्द है. रोटा वायरस की अनेक किस्मों और उप किस्मों के कारण मनुष्यों में रोग उत्पन्न होता है.
उन्होंने कहा कि रोटा वायरस संक्रमण का सबसे सामान्य लक्षण है पतला दस्त. इसके कारण बुखार, पेट का दर्द और उल्टी भी हो सकती है. रोटा वायरस विष्टा-मौखिक मार्ग, आर्थात किसी संक्रमित व्यक्ति के अपशिष्ट से दूसरे व्यक्ति के मुंह में फैलता है. यह हाथों और खिलौनों जैसी वस्तुओं पर मौजूद संदूषण के जरिये हो सकता है. वायरस बच्चों में आसानी से फैल सकता है और बच्चों से उन लोगों में पहुंच सकता है, जो उन बच्चों के सबसे निकट होते हैं.
रोटा वायरस के साथ किसी व्यक्ति के पहले संक्रमण से तीव्र रुग्णता होती है, लेकिन बाद के संक्रमण के हल्के लक्षण प्रकट होते हैं और ये प्राय: गैर-लक्षणात्मक (अर्थात नहीं दिखाई देने वाले लक्षण) होते हैं. हालांकि, वयस्कों में होने वाले गैर-लक्षणात्मक संक्रमण से निकट के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति तक वायरस का प्रसार हो सकता है.
यूनिसेफ के एसएमसी असजद एकबाल सागर ने कहा कि रोटा वायरस संक्रमण के लिए इलाज मौजूद है. रोटा वायरस वैक्सीन के शक्ल में. शिशु को गंभीर दस्त लगने का सबसे आम कारण है रोटा वायरस का संक्रमण. छह महीने के बच्चे से लेकर दो साल तक के बच्चे को रोटावायरस के संक्रमण का खतरा बना रहता है. रोटा वायरस वैक्सीन के अभाव में शिशु को रोटावायरस के संक्रमण से बचा पाना लगभग असंभव है.
इससे पहले की शिशु पांच साल का हो, हर शिशु को कम से कम एक बार तो रोटा वायरस के संक्रमण के कारण दस्त होता ही है.
ऐसे दी जायेगी खुराक
डब्लूएचओओ के एसएमओ अभिषेक पॉल ने बताया कि रोटा वायरस वैक्सीन का प्रथम डोज यानी की प्रथम पांच बूंद छह सप्ताह (डेढ़ माह ) की उम्र में पेंटावन के साथ दिया जायेगा. हर हाल में प्रथम डोज 12 माह के अंदर ही दे दिया जायेगा. 12 माह होने के बाद इसका प्रथम डोज नहीं दिया जा सकेगा. दूसरी खुराक 10 सप्ताह (ढाई माह) की उम्र में तथा तीसरी खुराक 14 सप्ताह की उम्र में दिया जायेगा.
उन्होंने कहा कि रोटा वायरस वैक्सीन सबसे आसान और प्रभावित तरीका है शिशु को दस्त की गंभीर बीमारी से बचाने का. जिन बच्चों को रोटा वायरस का टीका लग चुका है अगर उन बच्चों को दस्त लग जाये, तो भी उनकी स्थिति उतनी कष्टदायक नहीं होती है जितनी की उन बच्चों की जिन्हें रोटावायरस वैक्सीन का टीका नहीं लगाया गया है. रोटा वायरस का टीका केवल रोटा वायरस के विषाणु दोबारा होने वाले गंभीर दस्त से शिशु को बचाता.
अगर शिशु को किसी दूसरे कारण से दस्त हो जाते, तो रोटावायरस का टीका उसे रोकने में मदद नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि रोटा वायरस का कोई दुष्प्रभाव नहीं है. इसको नियमित टीकाकरण में शामिल किया जायेगा.
ओरल दी जायेगी रोटा वायरस वैक्सीन
यूनिसेफ के एसएमसी ने कहा कि रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया है. यह वैक्सीन ओरल दी जायेगी. एक खुराक में पांच बूंद पिलाई जायेगी. बच्चे के जन्म के छह हफ्ते के बाद पेंटावेलेंट एक की डोज के साथ पहली खुराक. 10वें हफ्ते के बाद पेंटावेलेंट दो की डोज के साथ दूसरी खुराक व 14 हफ्ते बाद पेंटावेलेंट तीन की डोज के साथ तीसरी खुराक दी जायेगी.
अगर चूक गये हैं तो एक साल के अंदर पहली खुराक पिलाने पर एक साल के बाद भी कोर्स पूरा कर सकते हैं. एक साल बाद खुराक शुरू नहीं की जायेगी. उन्होंने कहा कि जन जागरूकता के लिए समुदाय को तथा आशा, सेविका और एएनएम को जागरूक व प्रशिक्षित किया जा चुका है. आंगनबाड़ी केंद्रों व पीएचसी सहित अस्पतालों में पांच बूंद रोटा वायरस वैक्सीन दी जायेगी.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >