बिक्रमगंज (रोहतास) : बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते जीवन को बचाने में अगर मेरे प्राण भी संकट में पड़ जाएं तो मुझे परवाह नहीं, लेकिन जल के बिना खेत अन्न उपजाना बंद कर दें, मवेशी दूध देना बंद कर दें, इंसान आपस में लड़कर मर जाएं तो मेरा जीवन निरर्थक होगा. मेरे रास्ते में जो भी रोड़े आयेंगे मैं हर उस रोड़े को हटाऊंगा, ताकि लोगों के होठ कभी प्यास से ना मुरझाये.
प्रधानमंत्री की पहल पर अब बहुरेंगे सिकठी के आहर और तालाब के दिन
बिक्रमगंज (रोहतास) : बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते जीवन को बचाने में अगर मेरे प्राण भी संकट में पड़ जाएं तो मुझे परवाह नहीं, लेकिन जल के बिना खेत अन्न उपजाना बंद कर दें, मवेशी दूध देना बंद कर दें, इंसान आपस में लड़कर मर जाएं तो मेरा जीवन निरर्थक होगा. मेरे रास्ते में जो […]

यह कहना है जल संचय की लड़ाई में प्रधानमंत्री मोदी को भी अपना मुरीद बनाने वाले आरटीआइ कार्यकर्ता श्रीभगवान सिंह सिकठी का. जिनके पत्र की फरियाद सुनकर प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इनको इस लडाई के लिए धन्यवाद दिया था. विभागीय अधिकारियों को बोल गांव के आहर व तालाब की दुर्दशा संवारने को 94 लाख 35 हजार की राशि स्वीकृत करायी.
जिसे बरसात बाद पूर्ण किया जायेगा. अपने गांव संझौली प्रखंड के सिकठी में करीब 7 एकड़ में फैले तालाब व आहर पर अतिक्रमण कर बनाये गये घर को हटाने की लड़ाई में निर्णायक मोड़ पर पहुंचने वाले श्रीभगवान सिंह को धमकियां मिलना आम बात है, लेकिन उन्होंने अपना इरादा कभी नहीं बदला और निडरता के साथ मुहिम को धार देते रहे. आहर पोखर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए अब वे संझौली प्रखंड के लगभग सभी गांवों के लिए एक मुहिम चला रहे है.
अंचलाधिकारी आशीष कुमार ने प्रखंड के लगभग 300 छोटे बड़े तालाबों को अतिक्रमणमुक्त करने की ओर कदम बढ़ाया है. सब कुछ अगर ठीक रहा तो बरसात बाद इस पर तेजी से काम शुरू किया जायेगा. इनके इस सार्थक प्रयास की सराहना करते हुए चैता इंग्लिश निवासी दिलीप सिंह कहते है कि भले ही इस मुहिम में कुछ लोगों को व्यक्तिगत हानि होगी, लेकिन सामुदायिक फायदे बहुत हैं. जिसका सुखद परिणाम भी दूरगामी होगा.
कौन हैं आरटीआइ कार्यकर्ता भगवान सिंह
बिहार सरकार के प्रोद्योगिकी मंत्री जयकुमार सिंह जब पहली बार बिक्रमगंज के विधायक बने तब उन्होंने संझौली प्रखंड के सिकठी गांव में 2 लाख 56 हजार की लागत से एक सामुदायिक भवन देने की घोषणा की, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी काम नहीं लगा तो श्रीभगवान सिंह ने एक आरटीआइ लगा मामले की जानकारी मांगी. जिसके जवाब में भवन के लिए 2 लाख 56 हजार की राशि निकालने की बात स्वीकार की गयी.
इसके बाद जेइ सस्पेंड हुए और वेतन भुगतान रोक कर राशि जब्त की गयी. तालाब अतिक्रमणमुक्त के लिए उन्होंने उच्च न्यायालय से लेकर पीएमओ कार्यालय तक हाजिरी लगायी, तब 11 सितंबर, 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में उनके प्रयास की सराहना की. अब जिलाधिकारी रोहतास के समक्ष उपस्थित हो गुहार लगायी, जिसके बाद अब विभाग हरकत में आया है.