सासाराम : नगर पर्षद में विधायिका व कार्यपालिका के बीच विवाद गहराता जा रहा है. बजट के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए आहूत बुधवार की बैठक बेनतीजा समाप्त हो गयी. सशक्त स्थायी समिति ने करीब 212 करोड़ रुपये के बजट के प्रस्ताव को देखा तक नहीं. समिति सदस्य कार्यपालक पदाधिकारी से पिछली बैठक में अधूरी सौंपी स्थापना सूची को प्रस्तुत करने की मांग पर अड़े थे.
विधायिका व कार्यपालिका के विवाद में लटका बजट का प्रस्ताव
सासाराम : नगर पर्षद में विधायिका व कार्यपालिका के बीच विवाद गहराता जा रहा है. बजट के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए आहूत बुधवार की बैठक बेनतीजा समाप्त हो गयी. सशक्त स्थायी समिति ने करीब 212 करोड़ रुपये के बजट के प्रस्ताव को देखा तक नहीं. समिति सदस्य कार्यपालक पदाधिकारी से पिछली बैठक में अधूरी […]

मुख्य पार्षद कंचन देवी ने बताया कि नियम है कि बजट के प्रस्ताव से पूर्व विधिवत स्थापना की सूची का अनुमोदन सशक्त स्थायी समिति करती है. जबकि, कार्यपालक पदाधिकारी जनवरी 19 में इसके लिए पत्र देने और अब तक करीब सात बार स्मार पत्र देने के बावजूद पिछली बैठक में आधी अधूरी सूची प्रस्तुत की.
उस बैठक में समिति ने स्थापना की अपनी सूची का अनुमोदन कर दिया है. अब जब तक कार्यपालक पदाधिकारी अनुमोदित सूची के तहत कार्य नहीं करती या फिर स्थापना की अपनी विधिवत सूची समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत नहीं करती या फिर इसके लिए विभाग से मार्गदर्शन नहीं मांगती, तब तक बजट प्रस्ताव पर चर्चा करना संभव नहीं है.
उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने 31 मार्च तक बजट पारित कर भेजने का निर्देश दिया है. इस बीच कार्यपालक की ओर से पहल करनी होगी. वहीं, कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी ने कहा कि करीब 212 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव बना कर 28 फरवरी को दे दिया गया था.
अगर कुछ बात थी तो एक मार्च की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में ही कहनी चाहिए थी. मैंने तो स्थापना की सूची उसी बैठक में दे दी थी. उससे इतर कोई सूची मेरे पास नहीं है. मैंने अपना काम कर दिया है.
अपने आपको दोहरा रहा इतिहास
2017 में नगर पर्षद के बजट पर इसी तरह का मामला हुआ था. मार्च में बजट इस लिए पारित नहीं हो सका था कि मुख्य पार्षद कौन है? इसका पता नहीं चल रहा था. इसके बाद चुनाव आ गया. जब चुनाव समाप्त हुआ और 9 जून को नयी सरकार बनी तो कार्यपालक से विधायिका की ठन गयी.
उस वर्ष नगर पर्षद का बजट ईओ कुमारी हिमानी के आने के बाद दिसंबर माह में पारित हुआ. फिर वर्ष 2018 ठीक रहा और एक बार फिर वर्ष 2019-20 का बजट फंसता नजर आने लगा है. ले देकर मार्च बितने में तीन सप्ताह का समय बचा है. हालांकि, अभी समय है. सब कुछ ठीक हो जायेगा, तो एक दिन सशक्त स्थायी समिति व एक दिन बोर्ड की बैठक कर बजट पास हो सकता है.
कर्मचारियों के पद बदलने को लेकर चल रहा विवाद
नगर सरकार चाहती है, नगर पर्षद के कर्मचारियों के पदों में फेर बदल हो. कार्यपालक पदाधिकारी कर्मचारियों के पद के फेर बदल को अपना विशेषाधिकार मानती है. इसी में मामला फंस गया है.
एक मार्च की बैठक में सशक्त स्थायी समिति ने अपनी ओर से सूची का अनुमोदन कर कार्यपालक पदाधिकारी को सौंप दिया है, जिसमें प्रमुख रूप से प्रधान सहायक पप्पू कुमार, लेखापाल संगीता कुमारी, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र प्रभारी ओम प्रकाश सिन्हा, टैक्स दारोगा नसीमुद्दीन, सफाई प्रभारी प्रकाश कुमार व सहायक नेजाम होंगे. इनके अलावे कई कर्मचारियों के पद को बदला गया है.