एनीकट रोड में एसपी कोठी के सामने चकाचक, बाकी अंधेरे में

इसी रास्ते से मुख्य बाजार से झारखंडी मंदिर बीएमपी आदि जगहों के लिए रात में लोगों का रहता है आना-जाना रोज रात में अधिकारी गुजरते हैं, पर नहीं दिखती परेशानी डेहरी कार्यालय : शहर के हृदयस्थली कहे जाने वाले थाना चौक से एसपी कोठी होते झारखंडी मंदिर को जाने वाले एनीकट मुख्य पथ पर एसपी […]

इसी रास्ते से मुख्य बाजार से झारखंडी मंदिर बीएमपी आदि जगहों के लिए रात में लोगों का रहता है आना-जाना

रोज रात में अधिकारी गुजरते हैं, पर नहीं दिखती परेशानी
डेहरी कार्यालय : शहर के हृदयस्थली कहे जाने वाले थाना चौक से एसपी कोठी होते झारखंडी मंदिर को जाने वाले एनीकट मुख्य पथ पर एसपी कोठी के दोनों गेटों पर स्ट्रीट लाइट को छोड़कर उक्त सड़क पर कहीं भी प्रकाश की व्यवस्था नहीं है. अति महत्वपूर्ण उक्त सड़क पर बिसवां फाटक से लेकर झारखंडी मंदिर तक सोन नदी के तट पर शाम होने के बाद शहर के सैकड़ों लोग परिवार के साथ बैठ कर प्रकृति का आनंद लेते हैं.
देर रात तक वहां बैठे प्रकृति की खूबसूरती को निहारते हुए लोग एक-दूसरे के सुख-दुख को बांटते हैं. रात के अंधेरे में मोबाइल या इमरजेंसी लाइट के सहारे बैठे लोगों को इस बात का मलाल है कि नगर पर्षद प्रशासन द्वारा शहर की सौंदर्यीकरण के नाम पर खरबों रुपये खर्च किये गये, लेकिन मरीन ड्राइव के नाम से मशहूर एनीकट पथ में कहीं भी स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं की गयी.
लोगों को सबसे अधिक परेशानी उस पथ पर शादी-ब्याह के लग्न के समय होती है. जब ग्रामीण इलाकों या बाहर से झारखंडी मंदिर परिसर में शादी करने पहुंचे परिवार के सदस्यों को उक्त रास्ते रात में थाना चौक आना-जाना पड़ता है. एसपी कोठी में दोनों मुख्य दरवाजों पर स्ट्रीट लाइट के जलने से लोगों को उस रास्ते में आने जाने पर वहां कुछ सुकून मिलता है, लेकिन उसके आगे बढ़ने पर अंधेरा का भय उन्हें सताने लगता है. उक्त रास्ते से ही होकर प्रतिदिन व रात में जिले के वरीय अधिकारी बीएमपी की ओर अपने कार्यालयों में आते-जाते हैं. लोगों का कहना है कि सोन नदी के तट पर उक्त रमणीक स्थल पर अगर रात में प्रकाश की व्यवस्था कर दी जाये, तो शहर के आधे से अधिक लोग प्रकृति की सुंदरता को निहारने के लिए देर रात तक उक्त इलाके में परिवार के साथ बैठना पसंद करेंगे.
क्या कहते हैँ लोग
एनीकट सड़क पर एसपी कोठी के दक्षिण के तरफ सड़क पर अंधेरा छाने से उस रास्ते आने जानेवालों को काफी परेशानी होती है. प्रशासन को वहां प्रकाश की व्यवस्था करनी चाहिए.
मुन्नालाल कशेरा
लगन के दिनों में शहर ही नहीं दूसरे जिले व राज्यों से भी लोग ऐतिहासिक झारखंडी मंदिर में शादी में भाग लेने आते हैं. उक्त रास्ते पर छाये अंधेरा से शहर की अच्छी तस्वीर उनके मन में नहीं बनती.
कमला कांत पाठक
शहर के झारखंडी मंदिर में शादी विवाह के मौके पर बाहर से आयी महिलाओं द्वारा किसी कारण से अंधेरे में जाने पर कई बार अशोभनीय घटना हो चुकी है. यह चिंताजनक है. कदम उठाना जरूरी.
संजय गुप्ता
महत्वपूर्ण उक्त सड़क पर नगर पर्षद व स्थानीय प्रशासन अगर प्रकाश की व्यवस्था करने में फेल है, तो जनप्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए आगे आना चाहिए.

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